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Posted: April 20, 2024
चन्दन पांडेय की कहानी : शुभकामना का शव
राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, ‘वैधानिक गल्प’ और ‘कीर्तिगान’ जैसे उपन्यासों और कई असाधारण कहानियों के लेखक चन्दन पांडेय के हाल ही में प्रकाशित कहानी संग्रह ‘चोट’ से एक कहानी— ‘शुभकामना का शव’। इस कहानी की विषय-वस्तु इतनी भीषण है कि इसे पढ़ते हुए आप सिहर उठते हैं।Read more -
राजकमल ब्लॉग में राजनीतिक उपन्यासकार नवीन चौधरी बता रहे हैं कुछ ऐसी किताबों के बारे में जो राजनीति को भीतर से समझने में पाठकों को एक नई दृष्टि प्रदान करती हैं। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं की इन किताबों में से कुछ उपन्यास है और कुछ कथेतर किताबें।Read more
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राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, फ़िलीस्तीन की पृष्ठभूमि में लिखी गई लेबनानी पत्रकार तलत सौकेरत की कहानी ‘पंख’। यह कहानी लेखक-पत्रकार नासिरा शर्मा की नई किताब ‘फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला’ में संकलित है। फ़िलिस्तीन और इजरायल की राजनीति, समाज और साहित्य पर केन्द्रित इस किताब के माध्यम से हम यहूदियों और अरब फ़िलिस्तीनियों, दोनों के हालात को समझ सकते हैं।Read more
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आंबेडकर जयंती के अवसर पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर एक था संत’ का एक अंश। इस किताब के जरिए अरुंधति रॉय वर्तमान भारत में असमानता को समझने और उससे निपटने के लिए ज़ोर देकर कहती हैं कि हमें राजनैतिक विकास और मोहनदास करमचन्द गांधी के प्रभाव― दोनों का ही परीक्षण करना होगा। सोचना होगा कि क्यों भीमराव आंबेडकर द्वारा गांधी की लगभग दैवीय छवि को दी गई प्रबुद्ध चुनौती को भारत के कुलीन वर्ग द्वारा दबा दिया गया?
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हिन्दी के आँचलिक कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु के एक बेहद खास मित्र थे- बृजमोहन बाँयवाला। रेणु जी उनको बिरजू नाम से बुलाते थे। वे बिरजू को अक्सर चिट्ठी लिखा करते थे। उनकी चिट्ठियाँ राजकमल प्रकाशन से ‘चिट्ठियाँ रेणु की भाई बिरजू को’ शीर्षक से एक किताब के रूप में प्रकाशित है। जिसका संकलन बिरजू बाबू के छोटे भाई विद्यासागर गुप्ता ने और सम्पादन प्रयाग शुक्ल और रुचिरा गुप्ता ने किया है। राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, विद्यासागर गुप्ता द्वारा लिखित इस किताब की भूमिका का एक अंश।Read more
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Posted: April 08, 2024
चलो, अब धर्म से नाममात्र का भी रिश्ता न रहा
Read moreराहुल सांकृत्यायन की जयन्ती पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, अशोक कुमार पांडेय की किताब 'राहुल सांकृत्यायन: अनात्म बैचेनी का यायावर' का एक अंश।
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राजकमल ब्लॉग के इस अंक में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर पढ़ें, डॉ. यतीश अग्रवाल की किताब 'डायबिटीज के साथ जीने की राह' का अंश 'डायबिटीज क्या, क्यों और कैसे'।
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राजकमल ब्लॉग के इस अंक में पढ़ें, इरफ़ान हबीब द्वारा संपादित 'अकबर और तत्कालीन भारत' पुस्तक का एक अंश - 'अकबर के व्यक्तित्व की विशेषताएँ और उसकी विश्व-दृष्टि'।Read more
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Posted: March 30, 2024
रंग याद है : साठ सालों की दास्तान-ए-होली
बचपन में गलती से भांग घुली हुई ठंडाई पीने का किस्सा हो या अखबारों में होली के मौके पर निकलने वाले गप्प भरे चुटकियों वाले पन्ने से जुडी़ यादें… ‘रंग याद है’ शृंखला की इस कड़ी में पढ़ें, सुधा अरोड़ा की रंगयाद : “साठ सालों की दास्तान-ए-होली।" इसमें उन्होंने पिछले साठ वर्षों में देश के अलग-अलग शहरों- कोलकाता, जयपुर, इटावा, मुम्बई से बैंगलोर तक में मनाई गई होली की यादों को एक जगह समेटकर रख दिया है।Read more