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  4. मंडलोई की आत्मकथा सतपुड़ा और भूख का जीवंत अनुभव कराती है : विश्वनाथ त्रिपाठी
  5. निर्मला जैन की आत्मकथा ‘ज़माने में हम’ : बचपन में वापसी
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