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रघुवीर सहाय की पुण्यतिथि पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें उनके कविता संग्रह ‘हँसो हँसो जल्दी हँसो’ से पाँच कविताएँ… इस संग्रह में शामिल कविताएँ कविताएँ बार-बार पढ़ी गई हैं और बार-बार पढ़े जाने की माँग करती हैं, क्योंकि हमारे समूह-मन की जिन दरारों की ओर इन कविताओं ने संकेत किया था, आज वे और गहरी हो गई हैं।Read more
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राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, मनोहर श्याम जोशी के प्रतिनिधि व्यंग्य से उनका एक व्यंग्य― जिस देश में जीनियस बसते हैंRead more
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मिर्ज़ा ग़ालिब की जयंती पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, 1857 के जनविद्रोह के समय लिखी गई उनकी डायरी 'दस्तंबू' का एक अंश। अब्दुल बिस्मिल्लाह के सम्पादन में प्रकाशित इस पुस्तक का फ़ारसी से अनुवाद सैयद ऐनुल हसन ने किया है।
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इमरोज़ साहब ने पिछले दिनों दुनिया को अलविदा कह दिया पर वे अपने पी़छे उनको याद करते रहने की अनेक वजहें छोड़ गए हैं। अपने अनूठे चित्रों की बदौलत वे हमारी स्मृतियों में हमेशा बने रहेंगे। साहित्यिक दुनिया में अमृता-इमरोज़ का प्रेम सम्बन्ध अत्यन्त चर्चित रहा है। लगभग मिथकीय गरिमा हासिल कर चुके इस प्रेम सम्बन्ध को युवा कलाकार कुनाल हृदय ने अपने नाटक ‘इमरोज़’ में एक नई निगाह से देखते हुए प्रासंगिक ढ़ंग से प्रस्तुत किया है। राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, हाल ही में प्रकाशित इस नाटक का एक अंश।
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किसान दिवस पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, मनदीप पुनिया की किताब 'किसान आन्दोलन : ग्राउंड जीरो' का एक अंश