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तरुण भटनागर के उपन्यास ‘बेदावा’ पर डॉ. संगयोगिता वर्मा का आलेख
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Posted: March 24, 2025Categories: अपनी बात
सुगन्ध तुम लिख दो, फूल कोई न कोई लिख ही लेगा
Read moreविनोद कुमार शुक्ल को 59वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर रवीन्द्र आरोही की टिप्पणी
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Posted: March 22, 2025
पानी अब कह रहा है—मैं जीतूँगा, अगर तुम सुधरे नहीं तो
Read moreविश्व जल दिवस पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र के साक्षात्कारों की किताब ‘पर्यावरण के पाठ’ में संकलित टीवी शो सत्यमेव जयते में लिया गया उनका एक साक्षात्कार।
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मधु कांकरिया की नवीनतम पुस्तक ‘मेरी ढाका डायरी’ की ओमा शर्मा द्वारा समीक्षा
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शिवमूर्ति को पढ़ने का अर्थ है—उत्तर भारत के गाँवों को समग्रता में जानना। गाँव ही शिवमूर्ति की प्रकृत लीला-भूमि है। इसी पर केन्द्रित होकर उनका कथाकार दूर-दूर तक मँडराता है। आज हम इस अनूठे कथाकार का 75वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। राजकमल ब्लॉग में प्रस्तुत है, उनकी पुस्तकों का संक्षिप्त परिचय।