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Posted: November 01, 2025
उपलक्ष्य-75 : शिवमूर्ति के साथ
Read moreशिवमूर्ति की रचनात्मक यात्रा का उत्सव मनाने के लिए राजकमल प्रकाशन ने 31 अक्टूबर की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (एनेक्स) में विशेष कार्यक्रम ‘उपलक्ष्य–75’ का आयोजन किया।
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शिवमूर्ति को पढ़ने का अर्थ है—उत्तर भारत के गाँवों को समग्रता में जानना। गाँव ही शिवमूर्ति की प्रकृत लीला-भूमि है। इसी पर केन्द्रित होकर उनका कथाकार दूर-दूर तक मँडराता है। आज हम इस अनूठे कथाकार का 75वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। राजकमल ब्लॉग में प्रस्तुत है, उनकी पुस्तकों का संक्षिप्त परिचय।
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Posted: September 20, 2024
गाँवों में कैसे होता हैं दलितों का दमन?
राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, शिवमूर्ति के उपन्यास ‘अगम बहै दरियाव’ का एक अंश जिसमें गाँव के दबंगों द्वारा दलितों के दमन और उनकी बस्ती को जलाने के प्रसंग का बेहद मार्मिक वर्णन है।Read more