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राजकमल प्रकाशन समूह की सालाना दीपावली सेल ‘किताबतेरस’ 18 अक्टूबर यानी आज से शुरु हो गई है। इस बार किताबतेरस के मुख्य आकर्षण और ऑफर्स की जानकारी के लिए पढ़ें यह ख़ास ब्लॉग।Read more
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Posted: October 08, 2024
जेपी : एक दुविधाग्रस्त क्रान्तिकारी
जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, प्रोफ़ेसर ज्ञान प्रकाश की किताब ‘आपातकाल आख्यान : इन्दिरा गांधी और लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा’ का एक अंश जिसमें 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान उनकी गिरफ़्तारी और जेल के दिनों का वर्णन है।Read more -
राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, कथाकार वन्दना राग द्वारा पाठकों के लिए सुझायी गई हृषीकेश सुलभ की कहानी—‘खुला।’ यह कहानी ‘वसंत के हत्यारे’ संग्रह में संकलित है।Read more
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Posted: September 28, 2024Categories: किताबें
भगत सिंह को समझने के लिए कौनसी किताबें पढ़ें?
शहीदे-आज़म भगत सिंह की जयन्ती पर राजकमल ब्लॉग में उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण किताबों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत है। इन पुस्तकों में भगत सिंह से जुड़े दस्तावेज़, अदालती बयान, पत्र, रेखाचित्र, निबन्ध, जेल नोटबुक और उनके मूल्यांकन सम्बन्धी अभिलेखीय साक्ष्यों के समेत उनके साथियों के लिखे संस्मरण भी शामिल हैं। उस असाधारण व्यक्तित्व को समझने में निश्चय ही यह पुस्तकें बेहद उपयोगी हैं।Read more -
विश्व पर्यटन दिवस पर राजकमल ब्लॉग में कुछ घुमक्कड़ लेखकों के यात्रा-अनुभवों को बयान करती किताबों का परिचय प्रस्तुत है। इन कहानियों में बिमल दे की हिमालय की साहसिक यात्राओं से लेकर अनुराधा बेनीवाल की यायावरी-आवारगी तक शामिल हैं। प्रत्येक लेखक की यात्रा एक नई दुनिया का दरवाज़ा खोलती है।Read more
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Posted: September 20, 2024
गाँवों में कैसे होता हैं दलितों का दमन?
राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, शिवमूर्ति के उपन्यास ‘अगम बहै दरियाव’ का एक अंश जिसमें गाँव के दबंगों द्वारा दलितों के दमन और उनकी बस्ती को जलाने के प्रसंग का बेहद मार्मिक वर्णन है।Read more -
श्रीकान्त वर्मा की जयंती पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, ‘प्रतिनिधि कविताएँ’ संग्रह में संकलित उनकी कुछ कविताएँ…Read more
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Posted: September 11, 2024
मुक्तिबोध और महादेवी वर्मा के विचारों का आईना
आज हिन्दी साहित्य के दो दिग्गजों— गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ और महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, ‘विचार का आईना’ शृंखला के अन्तर्गत प्रकाशित उनकी पुस्तकों से ऐसे अंश जो वर्तमान समय में भी अत्यंत प्रासंगिक और विचारणीय हैं। यहाँ हमने जिन अंशों को चुना है उनमें मुक्तिबोध ने ‘जनता के साहित्य’ को अपने शब्दों में परिभाषित किया है और महादेवी वर्मा ने ‘स्त्रियों की आर्थिक स्वतंत्रता’ के संबन्ध में अपने विचार व्यक्त किए हैं। लोकभारती प्रकाशन की विशेष परियोजना ‘विचार का आईना’ शृंखला के अन्तर्गत प्रकाशित पुस्तकों में विभिन्न साहित्यकारों, चिन्तकों और राजनेताओं के ‘कला साहित्य संस्कृति’ केन्द्रित चिन्तन को सार रूप में प्रस्तुत किया गया है।Read more -
अवतार सिंह संधू ‘पाश’ की जयंती पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें उनके कविता संग्रहों— ‘बीच का रास्ता नहीं होता’ और ‘समय ओ भाई समय’ में संकलित चुनिंदा कविताएँ। ‘पाश’ की कविताओं का पंजाबी से हिन्दी में अनुवाद और इन संग्रहों का सम्पादन प्रो. चमन लाल ने किया है।Read more