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मधु कांकरिया की नवीनतम पुस्तक ‘मेरी ढाका डायरी’ की ओमा शर्मा द्वारा समीक्षा
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शिवमूर्ति को पढ़ने का अर्थ है—उत्तर भारत के गाँवों को समग्रता में जानना। गाँव ही शिवमूर्ति की प्रकृत लीला-भूमि है। इसी पर केन्द्रित होकर उनका कथाकार दूर-दूर तक मँडराता है। आज हम इस अनूठे कथाकार का 75वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। राजकमल ब्लॉग में प्रस्तुत है, उनकी पुस्तकों का संक्षिप्त परिचय।
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देवी प्रसाद मिश्र की नवीनतम पुस्तक ‘कोई है जो’ पढ़कर कथाकार-सम्पादक मनोज कुमार पांडेय ने टिप्पणी लिखी है। आप भी पढ़ें।
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Posted: March 01, 2025
वर्तमान से बग़ावत करने वाले ही भविष्य का स्वर रचते हैं
Read moreराजकमल प्रकाशन दिवस पर आयोजित 'भविष्य के स्वर' कार्यक्रम के बारे में वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अपना अनुभव साझा किया है। आप भी पढ़िए।
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Posted: February 27, 2025Categories: प्रेस विज्ञप्ति
राजकमल सहयात्रा उत्सव-2025
Read moreराजकमल स्थापना दिवस पर आयोजित हो रहे ‘भविष्य के स्वर’ विचार पर्व में अब तक 25 युवा प्रतिभाएँ अपने व्याख्यान दे चुकी हैं। जिन्हें बाद में अन्य मंचों ने भी विशिष्ट प्रतिभा के रूप में स्वीकार किया। ‘भविष्य के स्वर’ के वक्ताओं के तौर पर 40 वर्ष तक की उम्र की विभिन्न पृष्ठभूमियों से आनेवाली उन प्रतिभाओं को चुना जाता है जिन्होंने साहित्य समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपने नवाचारों से सबका ध्यान खींचा है।
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Posted: February 22, 2025
लेखक होने का मतलब!
Read moreकृष्णा सोबती के संस्मरणों की शृंखला—हम हशमत (भाग-4) से एक अंश
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जहाँ हिन्दी बढ़ रही थी, वहीं उर्दू ने जन्म लिया। कहन का तरीका जो हिन्दी का था वही उर्दू का था। भावों का आरोह-अवरोह एक था। बोलनेवाले-लिखनेवाले एक जैसे थे जिनका रहन-सहन, खान-पान, जन्म-मरण, सभी क्रिया-व्यापार एक जैसे थे और एक साथ थे। केवल लिपि अलग थी।
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सूर्यबाला के उपन्यास ‘मेरे संधि पत्र’ पर विभा रानी की टिप्पणी
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Posted: January 13, 2025
उसने गांधी को क्यों मारा
Read moreराजकमल ब्लॉग में पढ़ें, अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘उसने गांधी को क्यों मारा’ का एक अंश