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  • सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित- ‘व्योमकेश दरवेश’ के लिए मिला सम्मान

    नई दिल्ली- हिंदी के वरिष्ठ साहित्य समालोचक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी को उनकी रचना ‘व्योमकेश दरवेश’ के लिए साल 2014 के 28वें मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा दिए जाने वाले इस सम्मान के लिए साहित्य अकादमी के सभागार में प्रख्यात फ़िल्मकार गोविन्द निलहानी, ज्ञानपीठ के प्रबंध न्यासी साहू अखिलेश जैन, आजीवन न्यासी अपराजिता जैन महाजन, ट्रस्टी स्वदेशभूषण जैन और निदेशक लीलाधर मंडलोई ने डॉ. त्रिपाठी को सरस्वती देवी की प्रतिमा, प्रशस्ति पत्र और चार लाख रुपए की राशी का एक चैक देकर सम्मानित किया.

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  • 'हिंदी अध्यापन के क्षेत्र में किसी महिला की पहली आत्मकथा - केदारनाथ सिंह

    साहित्य अकादमी सभागार में निर्मला जैन की आत्मकथा के प्रकाशन के अवसर पर आयोजित ‘लेखक से बातचीत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह ने कहा कि सच को स्वीकार करने और लिखने के लिए, खासकर अपने नजदीकी लोगों के बारे में सही टिप्पणी करने के लिए बड़े ही साहस की जरूरत होती है और निर्मला जैन में वह मजबूती है, वह साहस है. यह उनकी आत्मकथा ‘ज़माने में हम’ में साफ़ उभर कर सामने आता है.

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  • दूधनाथ सिंह को 'भारत भारती’ ममता कालिया को 'लोहिया साहित्य सम्मान...

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का प्रतिष्ठित 'भारत भारती सम्मान’ वर्षर् 2013 के लिए प्रख्यात कथाकार दूधनाथ सिंह को दिया जाएगा। चर्चित कथाकार ममता कालिया को 'लोहिया साहित्य सम्मान’ तथा कुसुम खेमानी, डॉ. शंभुनाथ और विभूति नारायण राय को 'साहित्य भूषण सम्मान’ से नवाजा जाएगा।

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  • पाठकप्रिय पुस्तकें नई साज-सज्जा में

    राजकमल प्रकाशन समूह प्रस्तुत कर रहा है अपनी कुछ बहु प्रशंसित और पाठकप्रिय पुस्तकों को नई साज-सज्जा और आकर्षक कलेवर में। आशा है पाठक अपनी प्रिय पुस्तकों को नए रंग-रूप में और ज़्यादा संग्रहणीय पाएँगे।

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  • मुक्तिबोध-परम्परा के प्रतिनिधि कवि हैं रावत : ललित सुरजन भगवत रावत स्मृति सम्मान एवं व्याख्यान

    भोपाल : हिन्दी के जन-पक्षधर शीर्षस्थ कवि भगवत रावत की स्मृति में 'मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ द्वारा भोपाल के 'मायाराम सुरजन स्मृति भवन’ में सितम्बर महीने के अन्तिम दिन प्रख्यात पत्रकार, चिन्तक एवं लेखक ललित सुरजन की अध्यक्षता में 'भगवत रावत स्मृति सम्मान एवं व्याख्यान’ का आयोजन किया गया। ललित सुरजन एवं 'म.प्र. हिन्दी साहित्य 

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  • भाषाओं की सरहद तोड़ता 'समन्वय’ अपने चौथे साल में

    नई दिल्ली : सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र इंडिया हैबिटैट सेंटर में पिछले तीन सालों में एक बिलकुल नया सालाना आकर्षण जुड़ा है, वह है 'समन्वय : आईएचसी भारतीय भाषा महोत्सव’। भारतीय भाषाओं और बोलियों के लिखित-मौखिक साहित्य के लिए समर्पित भारत का यह अनूठा लिटरेचर फेस्टिवल अखिल भारतीय स्तर पर भारतीय भाषाओं और बोलियों से लेखकों, विचारकों और संस्कृतिकर्मियों को बुलाता रहा है।

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  • इंदिरा दांगी को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार

    नई दिल्ली : साहित्य अकादमी ने इस बार 23 भाषाओं में वार्षिक युवा पुरस्कारों की घोषणा की है। 

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  • परिचर्चा : भारतीय जनतंत्र का जायजा : पटना फूहड़पन और आक्रामकता जनतंत्र के लिए घातक हैं

    पटना : भारतीय जनतंत्र आज अत्यंत ही नाजुक मोड़ पर खड़ा है और उसे अपनी आबादी के बड़े हिस्से को यकीन दिलाना है कि उसने उसके साथ बराबरी का जो वादा किया था,  उसे लेकर वह ईमानदार और  गंभीर है। यह आबादी आदिवासियों,  मुसलमानों की है जो लगभग सत्तर साल के जनतांत्रिक अनुभव के बावजूद एक असमान स्थिति यापन करने को बाध्य हैं। 

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  • 'कर्म संन्यासी कृष्ण’ का हुआ लोकार्पण

    भोपाल : लोकभारती प्रकाशन से प्रकाशित झुन्नीलाल वर्मा कृत 'कर्म संन्यासी कृष्ण’ के लोकार्पण समारोह में बोलते हुए म.प्र. शासन के संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि, 'इस ग्रन्थ का इस समय आना नियति का ही खेल है क्योंकि इस समय इसकी प्रासंगिकता अधिक है,

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  • प्रकृति वनोदेय मारुति चितमपल्ली 7 अनुवादक : प्रकाश भातम्ब्रेकर

    वनसम्पदा प्रकृति का अनोखा उपहार है। वर्षा-पानी, कृषि, पशुपालन आदि अन्य उद्योग भी जंगलों के साथ अभिन्न रूप से जुड़े हैं। प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कई प्रकार के लाभ जंगलों से हमें प्राप्त होते हैं। जंगल भारतीय आध्यात्मिक जीवन-दर्शन एवं चिन्तन के पवित्र तथा उदात्त केन्द्र माने जाते हैं थे। इन्हीं सब विशेषताओं के मद्देनजर अनादि काल से वनांचल बहुमूल्य धरोहर माने जाते रहे हैं।

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  • उपन्यास चतुरंग दिलीप पुरुषोत्तम चित्रे 7 अनु. निशिकांत ठकार

    'चतुरंग’ को बीसवीं शताब्दी के सातवें-आठवें दशक का मुम्बई कॉस्मोपॉलिटन परिवेश एक नया आयाम प्रदान करता है।

    इसके साथ है दिलीप चित्रे की बिम्बधर्मी अभिव्यक्ति की कई शैलियों को अपनाने वाली सर्जनशील भाषा।

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  • फिल्म फिल्म उद्योगी दादासाहब फालके गंगाधर महाम्बरे 7 अनु. रेखा देशपांडे

    भारतीय सिने-जगत् के जनक स्व. धुंडिराज गोविंद फालके उर्फ दादासाहब फालके के जीवन व योगदान को यथोचित रेखांकित करने वाली यह पुस्तक ' फिल्म उद्योगी दादासाहब फालके’ एक 

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  • उपन्यास रौंदा हुआ निवाला सदानंद देशमुख 7 अनु. भगवान वैद्य 'प्रखर’

    गाँवों में गुजर-बसर कर रहे लोगों के दैनंदिन जीवन में घटने वाली घटनाओं को रेखांकित करने वाली कहानियों का संकलन है—'रौंदा हुआ निवाला’!

    अपनी इन तेरह कहानियों में लेखक ने गाँवों में व्याप्त विभिन्न समस्याओं की ओर पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है। ऐसी समस्याएँ, जिनसे प्रतिदिन उन्हें दो-चार होना पड़ता है।

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  • उपन्यास पिछले पृष्ठ से आगे... नारायण कुलकर्णी कवठेकर 7 अनु. : गजानन चव्हाण

    मराठी के प्रसिद्ध कवि नारायण कुलकर्णी कवठेकर के काव्य-संग्रह 'मागील पानावरून पुढे सुरू...’ का हिंदी अनुवाद है-'पिछले पृष्ठ से आगे...’!

    संग्रह की कविताएँ देश की समकालीन परिस्थितियों पर नई शैली में प्रकाश डालती हैं।

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  • बक्सर पुस्तक मेला : पुस्तक प्रेमियों की उमड़ी भीड

    पुस्तकों के प्रति आकर्षण, प्यार, लगाव आज भी कहीं बचा है तो वह गाँव ही है। इसका ताजा उदाहरण बक्सर पुस्तक मेला है। 10 दिनों तक चले इस पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमियों ने जमकर खरीदारी की।

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  • परिचर्चा : भारतीय जनतंत्र का जायजा : दिल्ली लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आने वाला भी तानाशाह हो सकता है : नामवर सिंह 'आलोचना' त्रैमासिक के अंक 53-54 के प्रकाशन के उपलक्ष्य में राजकमल प्रकाशन का आयोजन

    नई दिल्ली : 'आलोचना' (त्रैमासिक) के अंक 53-54 के प्रकाशन के उपलक्ष्य में 'भारतीय जनतंत्र का जायजा' विषय पर साहित्य अकादमी सभागार में आयोजित परिचर्चा में युवाओं की जबरदस्त भागीदारी रही। दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सहित अन्य अकादमिक संस्थानों के छात्रों ने जमकर हिस्सा लिया। उपस्थिति  का आलम यह था कि सभागार में पैर रखने की भी जगह नहीं थी।

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  • राजकमल चौधरी रचनावली का लोकार्पण विद्रोही व रूढ़िभंजक थे राजकमल चौधरी : मैनेजर पांडेय

    नई दिल्ली : दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में 'राजकमल चौधरी रचनावलीÓ का लोकार्पण प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह, मैनेजर पांडेय और विख्यात इतिहासकार तथा राजकमल चौधरी के अंतरंग मित्र डी.एन. झा ने किया। 

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  • डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी को 'व्योमकेश दरवेश’ के लिए मूर्तिदेवी सम्मान

    नई दिल्ली : हिन्दी के वरिष्ठ साहित्य समालोचक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी की रचना 'व्योमकेश दरवेशÓ को वर्ष 2014 के 28वें मूर्तिदेवी पुरस्कार के लिए चुना गया है।

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  • 'विचारधाराओं का अतिक्रमण करता है बड़ा कवि’ श्रीकांत वर्मा स्मृति-समारोह

    गोरखपुर : हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं साहित्य अकादमी के अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि श्रीकांत वर्मा का 'मगध’ एक ऐसा काव्य-रूपक है, जिसमें आजादी के बाद की भारतीय राजनीति की दुरभि- सन्धियों का तीक्ष्णता के साथ शिनाख्त और प्रतिरोध झलकता है। यह आयोजन श्रीकांत की स्मृति के बहाने उनकी काव्य-परम्परा को विकसित कर रहे कवियों का पाथेय है। इस परम्परा में मध्य प्रदेश के दूसरे कवि भगवत रावत भारतीय समाज के सामान्य जीवन के बड़े कवियों की पंक्ति में शामिल होते हैं।

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  • सुंदर चंद ठाकुर को अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान

    नई दिल्ली : चॢचत युवा कवि-कथाकार सुंदर चंद ठाकुर को इस बार का प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा-सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है।

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  • मनोग्रन्थियों से मुक्त कृति है 'मणिकॢणका’ : नामवर सिंह

    नई दिल्ली : नामवर सिंह ने रेखांकित किया कि 'मणिकॢणका’ जैसी सुपाठ्य आत्मकथा कम पढ़ी है। यह कृति समय, समाज, राजनीति और इतिहास के परिप्रेक्ष्य में तमाम मनोग्रंथियों से मुक्त होकर लिखी गई है। यह पुस्तक अपने कलात्मक वर्णन, चित्रण और तथ्यात्मक विशेषताओं के कारण एक विशुद्ध रूप से साहित्यिक कृति लगती है नहीं, बल्कि है।

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  • 'रह गईं दिशाएँ इसी पार’ पर विचार-गोष्ठी

    नई दिल्ली : 'राजकमल प्रकाशन’ से प्रकाशित प्रख्यात साहित्यकार संजीव के वैज्ञानिक शोधात्मक उपन्यास 'रह गईं दिशाएँ इसी पार’ पर गहन व गंभीर विचार-गोष्ठी का आयोजन साहित्यिक संस्था 'अभिव्यक्ति’ की तरफ से 14 अक्तूबर, 2014 को किया गया। गोष्ठी के आरम्भ में संजीव ने अपने वक्तव्य में बताया कि यह एक वैज्ञानिक खोज का उपन्यास है। इसके पात्र कपोल कल्पित नहीं 

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  • '1857 : बिहार में महायुद्ध’ का विमोचन

    ''अगर 1857 की क्रान्ति कामयाब हुई रहती तो देश का विभाजन नहीं होता। देश विभाजन का जख्म अब भी हरा है पर कुछ लोगों के लिए यह बँटवारा सत्ता हासिल करने में सहायक साबित हुआ।’’—ये बातें पटना पुस्तक मेले में गाँधीवादी रजी अहमद ने कहीं। वह वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत और प्रसन्न कुमार चौधरी की लिखी और राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक

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  • तुलसी-स्थापित हनुमान मन्दिरों की दयनीयता का दस्तावेज

    लखनऊ। लोकभारती प्रकाशन द्वारा प्रकाशित  श्रीराम मेहरोत्रा की 'तुलसी के हनुमान : काशी के विशेष संदर्भ में’ पुस्तक का लोकार्पण-समारोह 'नव परिमल’ के तत्त्वावधान में 19 अक्टूबर, 2014 को सायं 4:00 बजे लखनऊ के हिन्दी मीडिया सेन्टर हॉल में आयोजित किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता मदन मोहन 'मनुज’ ने  की। समारोह के मुख्य अतिथि थे डॉ. शम्भुनाथ तथा विशिष्ट अतिथि वाई.पी. सिंह।

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  • चंद्रकांता सम्मानित

    हरियाणा भवन चंडीगढ़ में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा से बाबू बालमुकुंद सम्मान प्राप्त करते सुप्रसिद्ध साहित्यकार चंद्रकांता। पुरस्कारस्वरूप उन्हें सम्मान पट्टिका, शाल एवं एक लाख रुपए की राशि प्रदान की गई।

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  • 'स्मरण संगीत’ पुस्तक का लोकार्पण

    इलाहाबाद। शैक्षिक, पौराणिक, सांस्कृतिक तथा गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की पावन संगम नगरी प्रयाग में गवर्नमेंट गर्ल्स इंटरमीडिएट कॉलेज के ग्राउंड पर दिनांक 31 अक्टूबर से 7 नवम्बर तक के.टी. फाउंडेशन द्वारा आयोजित दस दिवसीय पुस्तक मेले में लोकभारती प्रकाशन द्वारा प्रकाशित 'स्मरण संगीत’ पुस्तक का लोकार्पण समारोह दिनांक 5 नवम्बर, 2014 को अपरान्ह 

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  • कलम के धनी हैं मोरवाल : नंदकिशोर नवल

    पटना। 'किसी भी कथाकार की ताकत इस बात में निहित होती है कि उसकी कथा की संरचना कैसी है, वह लेखक दृश्य-चित्रण में सफल है या नहीं। तीसरी बात कि वह संवाद-प्रेषण में किस हद तक पटु है। ये तीनों ही विशेषताएँ भगवानदास मोरवाल के उपन्यास 'नरक मसीहा’ में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची हुई हैं। मोरवाल की कलम में बहुत ताकत है, बहुत शहजोर कलम है इनकी।

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  • लखनऊ में भी 'नरक मसीहा’ का विमोचन

    16 नवम्बर को लखनऊ, उत्तर प्रदेश के राय उमानाथ बली सभागार में आयोजित कथाक्रम सम्मान समारोह 2014 के दौरान उपन्यास 'नरक मसीहा’ का इस बार की सम्मानित कथाकार नासिरा शर्मा, वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना, 'तद्भव’ के संपादक और कथाकार अखिलेश, आलोचक वीरेन्द्र यादव तथा डॉ. चंद्रकला त्रिपाठी द्वारा लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ लेखक 

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  • भावुक हुए नामवर सिंह, भिगो गई ग़ज़लों की शाम

    दिल्ली। 'दिमाग़ पर दिल हावी है। दिल भर गया है दिमाग़ खाली है’ ये कहना था हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक डॉ. नामवर सिंह का। वे हिन्दी अकादमी की ओर से आयोजित युवा ग़ज़लकार और पत्रकार आलोक श्रीवास्तव के भावपूर्ण एकल ग़ज़ल पाठ के बाद भावुक लहज़े में बोल रहे थे। इस मौ$के पर विशेष रूप से दिल्ली आये अभिनेता ओम पुरी ने कहा कि—'आलोक की ग़ज़लों की भाषा इतनी सादा होती है कि किसी ल$फ्ज़ के मायने समझने की ज़रूरत ही पेश नहीं आती’।

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  • राधाकृष्ण अपने सुनहरे 50वें वर्ष में

    राधाकृष्ण प्रकाशन अपनी स्थापना के पचासवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 1965 से 2015 के बीच का स$फर अनेक ऐसे यशस्वी और विशिष्ट लेखकों से जुड़ते चले जाने का गौरवपूर्ण इतिहास है जो अपने समय के हस्ताक्षर हैं। अपने स्थापना काल से ही यह प्रकाशन रचनात्मक और आलोचनात्मक साहित्य को समान महत्त्व देता रहा है। साहित्य की विभिन्न विधाओं के 

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