Yun To Sab Kuchh Purvavat Hai

Author: Hema Dikshit
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Yun To Sab Kuchh Purvavat Hai
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हेमा दीक्षित ने कठिन काव्य-क्षेत्र में एक सहमा विकम्पित-सा क़दम रखा है। लेकिन जल्दी ही यह साफ़ हो जाता है कि जीवन-संघर्ष में वह कविता को अपना सम्बल और लड़ने का आयुध बनाना चाहती हैं। यह आग्रह उन्हें काव्य व्यक्तित्व देता है और उनके उपक्रम को जेनुइन बनाता है। कविता की अपनी पहली किताब में वह अपने स्वत्व और उसे कह पाने वाली भाषा के आविष्कार में सन्नद्ध दिखती हैं। काव्यशास्त्र में कविता के प्रयोजन के बारे में प्रायः पूछा जाता है कि कविता लिखने का उद्देश्य क्या है? हेमा के लिए इसका उत्तर यह है कि वह अपनी विकलताओं को कविता में लाना चाहती हैं। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जीवन की निजता को कविता में लाते हुए वह बहुत नैसर्गिक तरीक़े से निर्वैयक्तिकता को कविता में अनुस्यूत होने देती हैं। इस तरह निजी दुख सार्वजनीन दुख का प्रतिनिधि बन जाता है, अपना सन्ताप दुनिया का सन्ताप और न्याय को न पाने की निजी त्रासदी तमाम लोगों के न्याय को न पाने की अवस्थिति में बदल जाती है। इस तरह आत्म-सजगता के बावजूद आत्म-गरिमा का क्षरण नहीं होता जो आत्म-विस्तार में बदलकर किसी भी आत्म-ग्रस्तता का निषेध बन जाता है। उनकी कविता का पाठ किसी साँचे में ढले ऐस्थेटिक्स से न तो अनुकूलित है और न उसमें विद्रोह की कोई चौंकाने वाली अनावश्यक भंगिमा ही है। ऐसा भी नहीं कि उनकी सहज साहसिकता कविताओं में अव्यक्त रह जाए। अन्तर्वस्तु को न खोने का हठ यदि कविता का आत्मिक गुण माना जाता हो तो हेमा की कविता में उसकी ख़ला नहीं।

—देवी प्रसाद मिश्र

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2024
Edition Year 2024, Ed. 1st
Pages 152p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Hema Dikshit

Author: Hema Dikshit

हेमा दीक्षित

हेमा दीक्षित का जन्म 21 जुलाई, 1972 को कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। कानपुर विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक एवं विधि स्नातक। द्विमासिक विधि पत्रिका ‘विधिनय’ की सहायक सम्पादक। ‘कथादेश’, ‘पहली बार’, ‘अनुनाद’, ‘फर्गुदिया’ ‘अंजुरि’ आदि पत्रिकाओं में उनकी कविताएँ प्रकाशित हैं। स्त्री विषयक कविताओं के संग्रह ‘स्त्री होकर सवाल करती है...’ में कविताएँ संकलित। ‘मन्तव्य’ और ‘उत्पल’ आदि पत्रिकाओं में कुछ कहानियाँ और आलेख भी प्रकाशित। ‘पहल’, ‘पाखी’ और ‘रचना समय’ में अनुवाद प्रकाशित होते रहे हैं। हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेज़ी में भी लिखती हैं। ‘यूँ तो सब कुछ पूर्ववत् है’ उनका पहला कविता-संग्रह है।               

फ़िलहाल इन्दिरा आईवीएफ़, कानपुर में यूनिट मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं।

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