-
Posted: May 13, 2025Categories: पाठक की राय
रसभाँग : क़िस्से, इतिहास, मौज और सफ़र
Read moreअक्षय बहिबाला की किताब ‘रसभाँग’ पर प्रभात रंजन की टिप्पणी
-
Read more
राजकमल ब्लॉग में पढ़ें पेरियार का एक लेख, जिसमें उन्होंने कथित उच्च जातियों के वर्चस्व, सामाजिक असमानता और आरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे हैं। प्रमोद रंजन द्वारा सम्पादित किताब ‘जाति-व्यवस्था और पितृसत्ता’ में संकलित यह लेख आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
-
Posted: April 25, 2025Categories: प्रेस विज्ञप्ति
मंडलोई की आत्मकथा सतपुड़ा और भूख का जीवंत अनुभव कराती है : विश्वनाथ त्रिपाठी
Read moreलीलाधर मंडलोई की आत्मकथा 'जब से आँख खुली हैं' पर विचारगोष्ठी का आयोजन
-
Posted: April 24, 2025
डॉ. निर्मला जैन की स्मृति में सभा का आयोजन
Read moreडॉ. निर्मला जैन की स्मृति में 23 अप्रैल की शाम साहित्य अकादेमी सभागार में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अनेक साहित्यकारों, शिक्षकों और चिन्तकों ने डॉ. जैन को एक ऐसी विदुषी के रूप में स्मरण किया जिन्होंने अपने साहित्यिक और अध्यापकीय जीवन में साहस, सादगी और स्वायत्तता का आदर्श प्रस्तुत किया।
-
Posted: April 23, 2025
निर्मला जैन की आत्मकथा ‘ज़माने में हम’ : बचपन में वापसी
Read moreनिर्मला जैन की आत्मकथा ‘ज़माने में हम’ का अंश
-
Posted: April 21, 2025
स्मृतियों का कोलाज ‘बख़्तियारपुर’
Read moreविनय सौरभ के कविता-संग्रह ‘बख़्तियारपुर’ पर पुरू मालव की टिप्पणी
-
Posted: April 18, 2025Categories: प्रेस विज्ञप्ति
सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूँ गुज़री है अब तलक’ पर प्रेस वार्ता व बातचीत
Read moreसीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूँ गुज़री है अब तलक’ पर प्रेस वार्ता व बातचीत
-
Posted: April 17, 2025
उजला अँधेरा : आँसुओं में घुलकर बनी स्याही से लिखा गया उपन्यास
Read moreकैलाश वानखेड़े के उपन्यास ‘उजला अँधेरा’ की समीक्षा
समीक्षक : डॉ. संजय जोठे
-
Posted: April 16, 2025Categories: स्मरणTags: निर्मला जैन , ज़माने में हम , उषा प्रियम्वदा , Zamane Mein Hum , Usha Priyamvada , Nirmala Jain
निर्मला जैन से जुड़ी यादें… बातें…
Read moreनिर्मला जैन को कुछ इस तरह याद किया उषा प्रियम्वदा ने