पार्वती तिर्की की पाँच कविताएँ 

साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार-2025 से सम्मानित कवि पार्वती तिर्की के संग्रह ‘फिर उगना’ से पाँच कविताएँ

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निरन्तर

 

इस जंगल में 

चिड़ियों और मनुष्य का संवाद 

नदी की तरह क़ायम था—

निरन्तर...

 

बारिश से पहले 

जंगल गए लोग घर लौट आते थे 

बारिश के पहाड़ पर उतरने से पहले 

मनुष्य पहाड़ से उतर जाता था।

 

इस जंगल में 

जाइनसाला पक्षी का डेरा था, 

बारिश से पहले वह बोल देती थी—

 

‘ओ मनुष्य, देखो! 

बारिश होने वाली है, 

तुम जल्दी अपने घर चले जाओ।’

 

जाइनसाला का सन्देश

आज भी लोगों को अनचाहे भीगने नहीं देता 

वे बारिश से पहले जंगल से घर लौट आते हैं।

***

 

सोसो बंगला

 

आसमान में तारे खिले थे, 

पेड़ पर भागजोगनियों का झुंड 

गाँव के धुमकुड़िया में 

इकट्ठा थे लोग

 

रात के भोजन के बाद 

सोमरा की कहानी सुनने को बैठे थे—

 

“पहाड़ की तराई में 

जब लोगों ने गाँव बसाया...

 

वहाँ एक अंग्रेज आया 

वह गाँव के प्रमुख से मिला...

 

उससे कहा—

आप दयालु हैं, 

मुझे रहने के लिए

मात्र ‘एक बैल भर की जमीन’ दीजिए

 

प्रमुख ने सोचा—

बस इतनी-सी बात 

और वह राजी हो गया। 

अंग्रेज ‘कल आता हूँ’ 

कहकर चला गया

 

अगली सुबह जब वह आया 

साथ अपने एक मोची लाया, 

वह मोची बैठ गया 

और धागे की तरह काटने लगा… 

एक बैल के मांस से 

उसने पूरे सत्तर एकड़ की 

जमीन मापी

 

जमीन मापते धागा खत्म हुआ 

गाँव का प्रमुख हतप्रभ रहा

 

उसे टोकते हुए अंग्रेज़ बोला—

एक बैल भर की जमीन 

सौदे के हिसाब से अब मेरी हुई।

 

कहानी खत्म हुई…”

चाँद, भागजोगनी और लोगों ने अब जाना 

कि जमीन की एक बड़ी लूट 

कहानी बन गई।

 

(छोटानागपुर में बहुत समय पहले एक अंग्रेज़ आया था, और उसने सोसो नामक आदिवासी गाँव के बगल में एक बड़ा बंगला बनाया, वही सोसो बंगला कहलाया।)

***

 

भुला भूत

 

जंगल शान्त था... 

जंगल का भुला भूत 

पेड़ पर झूल रहा था

 

कन्द-फूल और लकड़ी लेने 

जाने वाले लोगों से 

वह खूब खेलता था, 

वह उनको रास्ते से भटका देता था।

 

लकड़ी चुनने के लिए 

जंगल जाने वाले लोग 

भुला भूत से परिचित थे 

इसलिए जंगल में घुसते हुए 

वे प्रार्थना करते थे

 

इधर बीच 

उसकी प्रार्थना न करने वाले लोग आए थे 

शायद वे जंगलखोर थे

 

उन लोगों ने 

जंगल के बीच 

एक चौड़ा रास्ता बनाया 

और जंगल को किनारे कर दिया 

फिर मकान बनाये 

पक्के-ऊँचे मकान 

और जंगल को पीछे धकेल दिया

 

मनुष्य खेल रहा था 

इस नए शहर में 

और जंगल का भुला भूत 

अपना रास्ता भटक गया था

 

भुला भूत के भटकने से 

उसकी प्रार्थना करने वाले लोग भी 

भटक गए 

वे इसी शहर के किसी ईंट-भट्टे में 

गोल-गोल घूम रहे हैं 

उनके घर जाने का रास्ता भी 

अब कहीं खो गया है।

***

 

वे पुरुष

 

वे पुरुष 

जिन्होंने स्त्रियों से प्रेम किया 

पंछियों के प्रति अधिक विनम्र हुए 

और धरती की ओर 

अधिक झुके हुए दिखे

 

वे पुरुष 

अपनी पीठ पर 

बच्चे को बेतराए(1) हुए 

और उन्हें खेलाते हुए दिखे

 

वे पुरुष 

जो स्त्रियों के गीतों को 

दोहराते हुए सुनाई पड़े 

वे पुरुष 

जिन्होंने स्त्रियों से प्रेम किया 

पुरुष होते हुए अधिक स्त्री हुए।

 

1. बच्चे को अपनी पीठ पर ढोना।

***

 

गीत गाते हुए लोग

 

गीत गाते हुए लोग 

कभी भीड़ का हिस्सा नहीं हुए

 

धर्म की ध्वजा उठाए लोगों ने 

जब देखा 

गीत गाते लोगों को 

वे खोजने लगे उनका धर्म

उनकी ध्वजा

 

अपनी खोज में नाकाम होकर 

उन्होंने उन लोगों को जंगली कहा 

वे समझ नहीं पाए 

कि मनुष्य जंगल का हिस्सा है

 

जंगली समझे जाने वाले लोगों ने 

कभी अपना प्रतिपक्ष नहीं रखा

 

वे गीत गाते रहे 

और कभी भीड़ का हिस्सा नहीं बने।

 

 

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