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Posted: June 11, 2025Categories: पुस्तक अंश
समलैंगिकता : ‘मने माणस वधारे फावे छे’
Read moreसुधीर चन्द्र द्वारा लिखित जीवनी ‘भूपेन खख्खर : एक अंतरंग संस्मरण’ का अंश
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Posted: June 07, 2025
देहरी पर पत्र : एक लेखक का पाठक होना देखना
Read moreनिर्मल वर्मा की किताब ‘देहरी पर पत्र’ की समीक्षा
समीक्षक : विनीता बाडमेरा
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Posted: June 05, 2025
जैसे सतपुड़ा की मिट्टी को हथेली पर रखकर देखना
Read moreलीलाधर मंडलोई की आत्मकथा ‘जब से आँख खुली है’ की समीक्षा
समीक्षक : जयप्रकाश मानस
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Posted: June 02, 2025
मालूम होता है कोई मास्टर मर गया है!
Read moreनन्ददुलारे वाजपेयी की जयशंकर प्रसाद पर केन्द्रित पुस्तक का वह अंश जिसमें प्रेमचंद की अन्तिम-यात्रा का प्रसंग है।