एक छात्रा ने पूछा है कि अच्छी किताबें कैसी होती हैं और उनका चुनाव किस तरह किया जाए?
चुनाव के प्रश्न को लेकर अभी भी मेरे भीतर दुविधा है। क्या हम कुछ भी चुन सकते हैं? क्या हमारा जीवन हमारे चुनावों से संचालित और नियंत्रित होता है? यात्राओं में हम दुर्घटना कभी नहीं चुनते, लेकिन वे होती हैं। अनुभव साक्षी है कि हम तय कुछ करते हैं और होता कुछ और है। जीवन में बहुत-सी बातें हैं जो नदी के प्रवाह की तरह हमारे सामने से गुजरती हैं और हमें भ्रम होता है कि इस प्रवाह को हमने चुना है।
अच्छी किताबें कैसी होती हैं? अच्छी किताबों के क्या सार्वभौमिक और सार्वकालिक मानक हो सकते हैं? मेरी समझ में अच्छी किताबें सुख देती हैं। वे हमारे भीतर की नमी को बहाल करती हैं। कल्पना और स्मृति के सूखे उजाड़ में वे बारिश की तरह उतरती हैं।
हमारा जीवन वर्तमान-आक्रांत है। पानी के एक क़तरे में छटपटाती और दम तोड़ती मछली-सा हो जाता है वर्तमान की तात्कालिकता में लिथड़ा हुआ जीवन। अच्छी किताबें एक गहरी और शांत झील का आगोश देती हैं।
मैं ज्ञान के महत्त्व को कमतर नहीं मानता, लेकिन मुझे लगता है कि अच्छी किताबें हमें ज्ञान की रोशनी से बाहर निकाल कर उस अँधेरे, रहस्य और मौन में ले जाती हैं, जहाँ जीवन अपनी सारी नाटकीयताओं से मुक्त होकर अपने वजूद को महसूस करता है।
अच्छी किताबें विमोचन और पुरस्कारों की चकाचौंध से बाहर जेनुइन पाठकों की प्रतीक्षा करती हैं। वे समीक्षित होने की वासना से मुक्त होती हैं। अच्छी किताबें व्यावसायिकता की सारी शर्तों को सिरे से ख़ारिज करती है।
अच्छी किताबें विकास की हत्यारी परियोजनाओं से बची हुई किसी पहाड़ी बस्ती की आत्मीयता और शांति से भरपूर होती हैं।
अच्छी किताबें हमें सूचनाओं के मलबे से बाहर निकलती हैं, जहाँ खुला आसमान है, झील में भीगती चाँद की परछाईं और पहाड़ों का मौन है, पुरखों की अनुभूतियों और स्मृतियों की याद दिलाता तारों से जगमगाता आसमान है।
अच्छी किताबों से गुजरते हुए हम अपनी सफलताओं के सुख और असफलताओं के दुख से मुक्त होते हैं। अच्छी किताबों में किसी निष्कर्ष तक पहुँचने की उतावली नहीं होती। वे भी मनुष्य के जीवन की तरह संशयों, अनुत्तरित प्रश्नों और निरुपायता की अँधेरी घाटियों से गुजरती हैं। इसलिए वे अपनी और भरोसेमंद लगती हैं।
अच्छी किताबें हमारे दुखों, आँसुओं और सपनों से संवाद करती हैं। अच्छी किताबें हमें संवेदनशील बनाती हैं, जिसकी रोशनी में हम मनुष्य केंद्रित विकास की विभीषिकाओं को देख पाते हैं।
अच्छी किताबों को पढ़कर यह एहसास गहरा होता है कि पृथ्वी पर मनुष्य के अलावा असंख्य प्राणी, वनस्पतियाँ और नदियाँ हैं और इनका भी जीवन है और इन्हें भी जीने का अधिकार है। इस अर्थ में अच्छी किताबें हमें एक बेहतर मनुष्य बनाती हैं।
क्या अच्छी किताबों की सूची तैयार की जा सकती है?
[प्रोफ़ेसर रामेश्वर राय की फ़ेसबुक वॉल से साभार]