‘किस्सा’ पत्रिका का वार्षिक शिव कुमार ‘शिव’ स्मृति सम्मान इस वर्ष देवी प्रसाद मिश्र और गौतम चौबे को प्रदान किया गया। यह पुरस्कार ‘किस्सा’ पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक और प्रसिद्ध साहित्यकार शिव कुमार ‘शिव’ की स्मृति में दिया जाता है, जो अपने गहरे सामाजिक सरोकारों और यथार्थवादी लेखन के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।
30 जुलाई की शाम इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित सम्मान समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में कथाकार महेश कटारे और ‘तद्भव’ पत्रिका के संपादक व कथाकार अखिलेश मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन धर्मेन्द्र सुशान्त ने किया।
इस दौरान देवी प्रसाद मिश्र को राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित उनके कहानी-संग्रह ‘कोई है जो और अन्य कहानियाँ’ तथा गौतम चौबे को राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित उनके उपन्यास ‘चक्का जाम’ के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत किस्सा पत्रिका की संपादक अनामिका ‘शिव’ के भावपूर्ण संबोधन से हुई। उन्होंने अपने पिता के साहित्यिक अवदान को स्मरण करते हुए कहा कि दोनों पुरस्कृत रचनाएँ उनकी साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाती हैं।

महेश कटारे ने कहा कि ये दोनों रचनाएँ अपने समय की चिंताओं को बड़ी कलात्मक गहराई के साथ व्यक्त करती हैं। उन्होंने कहा कि हिंसक और त्रासद पृष्ठभूमियों के बावजूद ये कृतियाँ जीवन के सतत संघर्ष को—लड़ते, घिसटते, मरते हुए भी—आगे बढ़ते रहने की मानवीय जिजीविषा के रूप में दर्ज करती हैं। यही इन कृतियों की सबसे बड़ी सफलता है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यही साहित्यिक दृष्टि शिव कुमार ‘शिव’ के लेखन का भी मूल स्वर रही है। इस अर्थ में ये दोनों कृतियाँ उनकी भाषाई विरासत को पूरी सक्षमता से आगे बढ़ा रही हैं। इस सन्दर्भ में उन्होंने शिव कुमार ‘शिव’ की रचनाओं ‘नेपथ्य के नायक’ और ‘महुआ घटवारिन’ का उल्लेख किया।
अखिलेश ने कहा कि ये रचनाएँ हाशिये पर खड़े व्यक्ति और उसकी विडंबनाओं को अपने विमर्श का केंद्र बनाती हैं। उन्होंने कहा, ठीक अपने पात्रों की ही तरह इन कृतियों में भी एक अव्यक्त संभावना निहित है। ‘चक्का जाम’ की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि लेखक ने इस कथा को जिस मोड़ पर लाकर छोड़ा है, उससे आगे इसका अगला भाग अवश्य आना चाहिए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वनाथ त्रिपाठी ने दोनों लेखकों को बधाई दी और उनके रचनात्मक कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने आग्रह किया कि लेखक अपने सार्थक लेखन-कर्म को निरंतर जारी रखें।
देवी प्रसाद मिश्र ने अपने स्वीकृति वक्तव्य में डब्ल्यू.एच. ऑडेन को उद्धृत करते हुए हमारे समय को ‘चिंताओं का युग’ (The Age of Anxiety) बताया। उन्होंने कहा कि एक ‘बाहरी’ के रूप में उनकी स्थिति ही उन्हें मुख्यधारा से बाहर के लोगों के संघर्षों को देखने और लिखने की दृष्टि देती है। गौतम चौबे को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक दुर्लभ और प्रशंसनीय संयोग है कि अंग्रेज़ी साहित्य के एक गंभीर अध्येता ने इतनी कुशलता से हिन्दी में कथा-साहित्य की रचना की है।

गौतम चौबे ने अपने वक्तव्य में लेखन के एकाकी स्वभाव और साहित्य की समावेशी प्रकृति पर प्रकाश डाला। इलाहाबाद के अपने किशोर दिनों को याद करते हुए उन्होंने ‘विविध भारती’ के उन श्रोताओं का उल्लेख किया जो स्टूडियो में फ़ोन करने पर अपने पूरे कुनबे को याद करना नहीं भूलते थे। उन्होंने कहा कि इसी अनुभव ने उन्हें सिखाया कि लेखन भले ही एकांत की प्रक्रिया हो, साहित्य सबको अपने में समेटने वाला माध्यम होता है। उन्होंने कहा कि उनका उपन्यास ‘चक्का जाम’ भी इसी समावेशी परंपरा की उपज है।
अंत में, ‘किस्सा’ पत्रिका की प्रबंध संपादक मीनाक्षी सिंघानिया ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और दोनों पुरस्कृत लेखकों को शुभकामनाएँ दीं। इसी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

शिव कुमार 'शिव' स्मृति सम्मान से सम्मानित कृतियाँ 'कोई है जो' और 'चक्का जाम'