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ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता ‘ठाकुर का कुआँ’ एक बार फिर राजनीतिक कारणों से चर्चा में है। राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, उनकी ‘सम्पूर्ण कविताएँ’ संग्रह से कुछ कविताएँ जो इसी तरह समाज की क्रूर जातिवादी सच्चाई को उजागर करने के साथ ही सामाजिक असमानता पर कड़े प्रहार करती है।Read more
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मंगलेश डबराल की जयंती पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, उनके नवीनतम कविता संग्रह ‘पानी का पत्थर’ से कुछ कविताएँ। यह संग्रह उनके जाने के बाद संकलित किया गया है। जो कविताएँ इसमें शामिल हैं उनमें कई कविताएँ ऐसी हैं जिन पर वे अभी काम कर रहे थे, और कुछ शायद ऐसी जो पहली कौंध में अभी उतारना शुरू ही हुई थीं, जिन्हें वे अभी और विस्तार देते, लेकिन अपने मौजूदा स्वरूप में भी उन्हें सम्पूर्ण कहा जा सकता है।Read more
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शमशेर बहादुर सिंह की जयंती पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, उनकी कविता 'टूटी हुई, बिखरी हुई'। यह कविता इसी शीर्षक से प्रकाशित उनके कविता संग्रह और 'प्रतिनिधि कविताएँ' में संकलित है।
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रघुवीर सहाय की पुण्यतिथि पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें उनके कविता संग्रह ‘हँसो हँसो जल्दी हँसो’ से पाँच कविताएँ… इस संग्रह में शामिल कविताएँ कविताएँ बार-बार पढ़ी गई हैं और बार-बार पढ़े जाने की माँग करती हैं, क्योंकि हमारे समूह-मन की जिन दरारों की ओर इन कविताओं ने संकेत किया था, आज वे और गहरी हो गई हैं।Read more
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राजकमल ब्लॉग के इस अंक में पढ़ें, त्रिलोचन की 'प्रतिनिधि कविताएँ' संग्रह से उनकी पाँच कविताएँ।