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Ye Jo Bihar Hai

Author: Arvind Mohan
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Ye Jo Bihar Hai

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यह जो बिहार है बिहार के स्वभाव, उसके बुनियादी चर‌त्रि, उसकी ताक़त और कमज़ोरियों को रेखांकित करते हुए किसी भी बिहारी, और साथ ही देश के अन्य लोगों को भी, यह बताने का प्रयास करती है कि बिहार वास्तव में है क्या, और क्यों किसी बिहारी को इस पर गर्व करना चाहिए।

बिहार की बनावट में जनक, याज्ञवल्क्य, पाणिनी, आर्यभट्ट, बुद्ध, महावीर, पतंजलि, चाणक्य, सिख गुरुओं, कबीर, गोरखनाथ से लेकर गांधी तक का योगदान है। आज भी ज्ञान को लेकर जैसी उत्कंठा बिहार-भूमि में मिलती है, वैसी कहीं और दुर्लभ है। यहाँ के मूल्यबोध को गढ़ने में मुख्य भूमिका शासकों की नहीं, दार्शनिकों की रही है।

यह किताब इन सब बातों की चर्चा करते हुए उस बिहार पर भी विचार करती है जो वह आज है—‌विकास के लगभग सभी पैमानों पर एकदम आखिरी, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, परिवहन तंत्र और नागरिक सुविधाओं आदि के मामले में पिछड़ा, जहाँ से लाखों लोग हर साल मजदूरों के रूप में पलायन करते हैं और जहाँ के लोगों को लोग बिहारी कहकर जैसे नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द मोहन द्वारा अलग-अलग समय पर लिखे गए आलेखों-टिप्पणियों के साथ खास तौर पर इसी किताब के लिए लिखी गई सामग्री से सम्पन्न यह किताब इन सबके राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों को तलाशने का काम करती है।

साथ ही यह भी कि ज्ञान का आदर और विद्वत्ता की परम्परा आज भी बिहार से आनेवाले छात्रों, आम पाठकों और उनकी चर्चाओं, बहसों में क्यों सबसे अलग और सबसे ऊर्जावान दिखाई देती है, और क्यों यहाँ के लोग अनुकरण और भक्ति के ऊपर तर्क और विमर्श को तरजीह देते रहे हैं।

यह किताब हमें बिहार को एक नयी समझ से देखने की वजहें उपलब्ध कराती है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 236p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1.5
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Arvind Mohan

Author: Arvind Mohan

अरविन्द मोहन

अरविन्द मोहन पिछले चालीस साल से ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। ‘जनसत्ता’, ‘इंडिया टुडे’, ‘हिन्दुस्तान’ और ‘अमर उजाला’ के बाद वे ‘एबीपी’ न्यूज से जुड़े रहे। तीन साल तक सीएसडीएस में सम्पादक थे। लेकिन इसी बीच समय-समय पर छुट्टी लेकर या साथ-साथ भी उन्होंने समाज-विज्ञान के विषयों पर काम किया है। लगभग दर्जन-भर किताबों का अनुवाद किया है और कई किताबों का सम्पादन किया है। उनका मुख्य अध्ययन गांधी पर केन्द्रित है। चुनाव और जाति के सम्बन्धों में उनकी खास दिलचस्पी रही है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में अतिथि अध्यापक के रूप में मीडिया के छात्रों को पढ़ाते हैं और ‘इंडिया न्यूज’ चैनल के सम्पादकीय सलाहकार हैं।

ई-मेल : [email protected]

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