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Hamar Champaran

Author: Arvind Mohan
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Hamar Champaran

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चम्पारण को आज हम ख़ासतौर पर गांधी के साथ याद करते हैं। सत्याग्रह और अहिंसा के अपने पहले प्रयोग भारत में उन्होंने इसी भूमि पर किये थे। लेकिन इसका इतिहास बहुत पीछे तक जाता है जिसमें राजा जनक, सीता, वाल्मीकि, लव-कुश जैसे पौराणिक चरित्रों से लेकर भगवान बुद्ध, चन्द्रगुप्त मौर्य, अशोक, हर्षवर्द्धन जैसे ऐत‌िहासिक शासकों के नाम आते हैं।

‘हमर चम्पारण’ इस ज़िले के जीवन, स्वभाव, इतिहास के कुछ महत्त्वपूर्ण पड़ावों और इसकी आर्थिक-सामाजिक अवस्थ‌ित‌ि के साथ उस भाव को साकार करने की कोशिश करती है, जिसे चम्पारण को जीने और जानने वाले महसूस करते हैं।

‘कुछ अपनी’ और ‘कुछ पराई’ शीर्षक दो भागों में संयोजित इस पुस्तक के पहले भाग में वरिष्‍ठ पत्रकार अरविन्द मोहन चम्पारण से अपनी भावनात्मक तारतम्यता को बनाए रखते हुए एक तरफ जहाँ उसका ऐत‌िहासिक और भौगोलिक परिचय देते हैं, वहीं चम्पारण सत्याग्रह, ध्रुपद की परम्परा, वहाँ की चीनी मिलों और गन्ने की खेती आदि विभ‌िन्न विषयों पर लिखे गए अपने शोधपरक आलेखों में चम्पारण का एक वृहत्तर चित्र पाठक के सामने रखते हैं जिसमें गांधी, नील की खेती, निलहों का जुल्म और चम्पारण के लोगों का संघर्ष ख़ासतौर पर दिखाई देता है। दूसरे भाग में लम्बे समय के दौरान इकट्ठा की गई सामग्री के साथ वे यहाँ कुछ ऐसे आलेख भी प्रस्तुत कर रहे हैं जो उन लोगों ने लिखे थे जिन्होंने बहुत गहराई से यहाँ के जीवन, आबोहवा और विडम्बना को देखा था। इनमें जॉन बीम्स, नगेन्द्रनाथ गुप्त, राजेन्द्र प्रसाद, पीर मुहम्मद मूनिस, शम्भुनाथ मिश्र और महात्मा गांधी के लेख उल्लेखनीय हैं।

यह चम्पारण का भाव-चित्र भी है और तथ्य-विश्लेषण भी। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 232p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1.5
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Arvind Mohan

Author: Arvind Mohan

अरविन्द मोहन

अरविन्द मोहन पिछले चालीस साल से ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। ‘जनसत्ता’, ‘इंडिया टुडे’, ‘हिन्दुस्तान’ और ‘अमर उजाला’ के बाद वे ‘एबीपी’ न्यूज से जुड़े रहे। तीन साल तक सीएसडीएस में सम्पादक थे। लेकिन इसी बीच समय-समय पर छुट्टी लेकर या साथ-साथ भी उन्होंने समाज-विज्ञान के विषयों पर काम किया है। लगभग दर्जन-भर किताबों का अनुवाद किया है और कई किताबों का सम्पादन किया है। उनका मुख्य अध्ययन गांधी पर केन्द्रित है। चुनाव और जाति के सम्बन्धों में उनकी खास दिलचस्पी रही है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में अतिथि अध्यापक के रूप में मीडिया के छात्रों को पढ़ाते हैं और ‘इंडिया न्यूज’ चैनल के सम्पादकीय सलाहकार हैं।

ई-मेल : [email protected]

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