Facebook Pixel

Bahe So Ganga : Dark Zone Mein Badalta Uttar Bharat

Author: Manjit Thakur
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
As low as ₹337.50 Regular Price ₹450.00
25% Off
In stock
SKU
Bahe So Ganga : Dark Zone Mein Badalta Uttar Bharat

- +
Share:
Codicon

बहे सो गंगा सामान्यतः जल के आसन्न विश्वव्यापी संकट और विशेषतः भारत में गंगा और अन्य नदियों के सामने मौजूद ख़तरे को संबोधित सिर्फ़ एक किताब नहीं बल्कि एक चेतावनी है। लगातार बढ़ती जनसंख्या, प्रकृति का दोहन करनेवाली विकास-परियोजनाएँ, पानी के समुचित संरक्षण को लेकर समाज और सरकारों की लापरवाही, पर्यावरण असन्तुलन, जलवायु परिवर्तन, और अन्य अनेक कारणों से दुनिया-भर की नदियों में पानी कम हो रहा है। वे नदियाँ जो पूरे साल बहा करती थीं, मौसमी नदियों में बदल गई हैं।

अनेक शोध-सर्वेक्षणों, सरकारी-गैरसरकारी रिपोर्टों और निजी स्तर पर किए गए राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय अध्ययनों का उपयोग करते हुए लिखी गई यह किताब इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या नदियाँ मर जाएँगी!

लेखक की चिन्ता है कि इस मुद्दे पर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाहों को अनदेखा किया जा रहा है, और सारा ध्यान फौरी फायदों तक सिमटकर रह गया है। वे कहते हैं कि ऐसा समय आ सकता है जब मुफ्त बिजली और वाई-फाई के बजाय राजनीतिक दल रसोई और पीने के लिए पर्याप्त जल के नाम पर वोट माँगेंगे!

नदियों के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक आयामों और उनके चिन्ताजनक भविष्य पर साथ-साथ विचार करती हुई यह तथ्यपरक किताब हर किसी को पढ़नी चाहिए।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 320p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 19.5 X 13 X 2
Write Your Own Review
You're reviewing:Bahe So Ganga : Dark Zone Mein Badalta Uttar Bharat
Your Rating
Manjit Thakur

Author: Manjit Thakur

मंजीत ठाकुर

मंजीत ठाकुर पेशे से पत्रकार हैं। झारखंड के मधुपुर में जन्मे मूलतः मिथिला के गाँव ठाहर के निवासी हैं। उन्होंने आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो और टीवी पत्रकारिता में डिप्लोमा के बाद भारतीय फ़िल्म और टेलिविज़न संस्थान, पुणे से फ़िल्म की पढ़ाई की। पत्रकारिता की शुरुआत ‘नवभारत टाइम्स’ से हुई। ‘डीडी न्यूज़’ में लम्बा वक़्त बिताने के बाद ‘इंडिया टुडे’ और ‘पॉकेट एफ़एम’ में भी रहे। ‘ये जो देश है मेरा’, ‘बंगाल में भाजपा’ और ‘गर्भनाल’ उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं।

2014 में ‘डीडी न्यूज़’ के लिए उन्होंने गंगा-पथ की यात्रा की और इस नदी से जुड़ी समस्याओं, आख्यानों, लोक-परम्पराओं, प्रदूषण तथा स्थानीय समस्याओं को नज़दीक से जाना और ‘डीडी’ पर प्रसारित डॉक्यूमेंट्री सीरीज़, ‘ताकि बहती रहे गंगा’ बनाई। वे ‘इंडिया टुडे’ में नदियों पर आधारित ‘नदीसूत्र’ और वेब पोर्टल ‘जनपथ’ में पर्यावरणीय मसलों पर ‘पंचतत्व’ नामक साप्ताहिक कॉलम भी लिखते हैं। फ़िलहाल दिल्ली में रहते हैं और सात भाषाओं के वेब पोर्टल ‘आवाज़ : द वॉयस’ के एडिटर हैं।

ई-मेल : [email protected] 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top