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Jirah Ajudhia

Author: Rakesh Tewari
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Jirah Ajudhia

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‘रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद’ को लेकर बहुत कुछ लिखा जा चुका है। ‘जिरह अजुधिया : एक पुरातत्त्ववेत्ता की कलम से’ उन सबसे इस मामले में अलग है कि इसे उस व्यक्ति ने लिखा है जो इस विवाद के सबसे निर्णायक मोड़ पर विवादित स्थल के सबसे निकट था। न सिर्फ वहाँ मौजूद बल्कि उस प्रक्रिया में शामिल भी जो उस जगह की सदियों पुरानी मिट्टी को छानकर वास्तविकता के प्रमाण जुटाने के लिए की जा रही थी।

न्यायालय द्वारा विवादित स्थल के पुरावशेषों की जाँच और संग्रह का काम जब पुरातत्त्व विभाग को सौंपा गया, राकेश तिवारी उस समय इस विभाग के निदेशक थे। उन्हीं के नेतृत्व में वह अभिलेखीकरण हुआ जो न्यायालय के अन्तिम फैसले का भी आधार बना।

इस पुस्तक में उन्होंने उस पूरी प्रक्रिया और उससे सम्बन्धित अदालती जिरह का ब्योरेवार विवरण दिया है, इस विवाद की पूरी राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ। निष्पक्ष और तथ्यों-साक्ष्यों पर आधारित वह पूरा घटनाक्रम भी इस पुस्तक में उपलब्ध है जो तमाम बहसों और विवादों के घटाटोप में इस तरह सामने नहीं आ सकता था। लेखक ने पुरातत्त्ववेत्ताओं और इतिहासकारों के उन मतों का भी संक्षिप्त लेकिन सारभूत रूप में उल्लेख किया है जो अयोध्या और राम की ऐतिहासिकता को लेकर बीच-बीच में सामने आते रहे। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 374p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2
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Rakesh Tewari

Author: Rakesh Tewari

राकेश तिवारी

राकेश तिवारी, रॉकी का जन्म 2 अक्टूबर, 1953 को सीतापुर ज़िले के बिसवाँ गाँव में हुआ। वैसे ये मूल निवासी उत्तर-प्रदेश के बस्ती ज़िला के हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विषय में स्नातकोत्तर, मिर्ज़ापुर के चित्रित शैलाश्रयों पर अवध विश्वविद्यालय से पीएच.डी.। लगभग चार दशक तक देश के विभिन्न भागों में पुरातात्त्विक सर्वेक्षण एवं उत्खनन तथा गंगा-घाटी को दक्षिण भारत से जोड़नेवाले प्राचीन ‘दक्षिणा-पथ’ की यात्रा एवं गहन अध्ययन। कई देशों की यात्राएँ।

प्रकाशित कृतियाँ—लखनऊ से काठमांडू तक साइकिल से नेपाल की यात्रा पर आधारित ‘पहियों के इर्द-गिर्द’, दिल्ली से कलकत्ता तक की नौका-यात्रा पर आधारित यात्रा-वृत्तान्त ‘सफ़र एक डोंगी में डगमग’, उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भू-भाग (ज़िला–मिर्ज़ापुर, सोनभद्र और चंदौली) के सर्वेक्षण एवं सैर पर आधारित संस्मरण ‘पवन ऐसा डोलै’, चिली एवं टर्की की यात्राओं पर आधारित यात्रा विवरण ‘पहलू में आए ओर-छोर : दो देश : चिली और टर्की’। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हिमालय, अफ़ग़ानिस्तान, मॉरीशस के यात्रा-संस्मरण, कविताएँ आदि प्रकाशित।

महानिदेशक, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के पद से सेवानिवृत्त।

सम्पर्क : [email protected]

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