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Jeevan Ke Arth Ki Khoj

Author: Mayank Murari
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Jeevan Ke Arth Ki Khoj

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‘जीवन के अर्थ की खोज’ मनुष्य मात्र के होने, देखने, जीने, कर्म करने को सृष्टि के साथ जोड़कर देखती है। जीवन को यह बड़े फ़लक पर उत्स से पढ़ती है। अर्थ निर्मिति की संश्लिष्टता को विवेचित करने के लिए धर्म, मिथक, अध्यात्म, दर्शन और विज्ञान की स्थापनाओं से गुज़रती हुई प्राचीन और आधुनिक-उत्तर आधुनिक समय में जीवन और विकास की गति को केन्द्र में रखकर मानव-जीवन की खोज के सत्य पर रोशनी डालती है। इस किताब में विश्व लेखकों का मनुष्य सम्बन्धी जो गम्भीर अध्ययन है, विचारों का जो हासिल है, उसको आधार बनाकर अपनी दृष्टि का सम्यक उजागर है। वह एकायामी नहीं है।

इसमें जीवन-मरण के बीच जीवन स्पर्श, स्वर, आकार, स्मृति, गति, ठहराव, अस्मिता आदि के सवालों से ज़िरह है। लेखक ने मूलभूत प्रश्नों यथा प्रेम, करुणा, दुख, सुख, आनन्द, मनुष्यत्व, उत्थान-पतन, भौतिकता जैसे महत्त्वपूर्ण सन्दर्भों से गुज़रकर मनुष्य की खोज के जटिल पहलुओं को समझने की एक आधारभूमि चिन्तन के लिए प्रस्तुत की है। सहमति-असहमति अपनी जगह है। पंच महाभूतों के महत्त्व के साथ उनके मातृत्व, आनन्द, संगीत और सकारात्मक ऊर्जा की अभ्यर्थना को लेखक ने मनुष्यता के लिए अपरिहार्य माना है। मान-अपमान से रहित व्यक्ति ही ब्रह्म है। लेखक मानव की यात्रा को अबाध रूप में अभिहित करता है। यात्रा मंज़िल नहीं है। वह हर भागते पल में ठहराव का आनन्द और सत्य की परिभाषा है। मनुष्य वही है, मनुष्यता वही है जहाँ जीवन वैविध्य की खोज सृष्टि की संयुक्तता में निहित हो।

—लीलाधर मंडलोई 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 216p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Mayank Murari

Author: Mayank Murari

मयंक मुरारी

मयंक मुरारी ने राजनीतिशास्त्र में स्नातकोत्तर किया। उन्होंने ग्रामीण विकास, प्रबन्धन, जनसम्पर्क एवं पत्रकारिता का अध्ययन भी किया है।  ‘विकास के वैकल्पिक माध्यम’ विषय पर पी-एच.डी.

की है। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘मानववाद एवं राजव्यवस्था’, ‘राजनीति एवं प्रशासन’, ‘भारत : एक सनातन राष्ट्र’, ‘माई : एक जीवनी’, ‘झारखंड के अनजाने खेल’, ‘झारखंड की लोक कथाएँ’, ‘लोक जीवन : पहचान, परम्परा और प्रतिमान’, ‘यात्रा बीच ठहरे कदम’, ‘ओ जीवन के शाश्वत साथी’, ‘पुरुषोत्तम की पदयात्रा’, ‘अच्छाई की खोज’, ‘भगवा ध्वज’, ‘जंबूद्वीपे भरतखंडे’, ‘दिव्य जीवन’, ‘सनातन उत्सव का देश’, ‘The Tribal Braveheart’ आदि शामिल हैं। इसके अलावा आध्यात्मिक और भारतीय दर्शन पर आधारित उनके आलेख देश के सभी प्रतिष्ठित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं। वे व्यक्तित्व विकास, प्रेरणा और संवाद के अलावा भारतीय परम्परा एवं जीवन पर विभिन्न विद्यालयों एवं संस्थानों में नियमित तौर पर व्याख्यान भी देते हैं।

उन्हें झारखंड विधानसभा के ‘सृजन सम्मान’, ‘तुलसी सम्मान’, ‘शब्द शिल्प सम्मान’, ‘प्रभात खबर सम्मान’, ‘विद्या वाचस्पति’, ‘झारखंड गौरव सम्मान’, ‘सिद्धनाथ कुमार स्मृति सम्मान’, ‘झारखंड रत्न’, ‘जयशंकर प्रसाद स्मृति सम्मान’, ‘साहित्य अकादेमी रामदयाल मुंडा कथेतर सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। समाज सेवा के लिए उन्हें ‘लायंस क्लब ऑफ राँची’ समेत अन्य संस्थाओं द्वारा भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

ई-मेल : [email protected]

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