Facebook Pixel

Ashre

Author: Idrees Babar
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
As low as ₹187.50 Regular Price ₹250.00
25% Off
In stock
SKU
Ashre

- +
Share:
Codicon

‘अरबी ज़बान’ में ‘अशरा’ लफ़्ज़ के मानी होते हैं—'दस', इसी से ये बात समझ आनी चाहिए कि इदरीस बाबर ने उर्दू में एक ऐसी सिन्फ़ या फ़ॉर्म ईजाद की है, जिसमें सिर्फ़ दस मिसरे होते हैं। दिलचस्प बात ये है कि ‘अशरा’ किसी भी तरह लिखा जा सकता है। ग़ज़ल, नज़्म, आज़ाद नज़्म या फिर नसरी नज़्म के तौर पर भी। इसी लिए इस किताब में आपको ‘अशरे’ के ये सभी रूप दिखाई देंगे। ‘अशरे’ को किसी ख़ास मौज़ू का मोहताज भी नहीं बनाया गया है, एक अशरा जहाँ सियासी हो सकता है तो वहीं दूसरा ‘समाजी’ और 'इस्लाही' या फिर इश्क़-ओ-आशिक़ी से भी उसका तअल्लुक़ हो सकता है। ऐसा नहीं है कि क्लासिकल शायरी में दस मिसरों की ऐसी कोई सिन्फ़ मौजूद नहीं थी, दकन से लेकर शुमाली हिन्दुस्तान तक दस मिसरों की ऐसी नज़्मों को ‘मुअश्शर’ कहा जाता था। मगर इदरीस बाबर की इस नई सिन्फ़ ने ख़ुद को बहर और उस्लूब की क़ैद से आज़ाद करके इसमें कई नए इमकान पैदा कर दिए हैं, इस बात का सुबूत आपको ये किताब पढ़ कर मिल जाएगा। इदरीस बाबर नए शायरों में एक बेचैन और तज’रबा-पसन्द शायर हैं। वह किसी एक कल बैठने को तख़लीक़कार के लिए अच्छा नहीं मानते। इसी वजह से उनके यहाँ अलफ़ाज़ से लेकर अहसास तक हर क़दम पर नैरंगी दिखाई देती है। उर्दू अदब में इदरीस बाबर की ईजाद की हुई इस सिन्फ़ का इस्तक़बाल हुआ है और बहुत से लोग अशरे लिख रहे हैं। आप भी अगर उर्दू अदब में तेज़ी से पनपती इस नई सिन्फ़-ए-सुख़न से वाक़िफ़ होना चाहते हैं तो ये किताब ज़रूर पढ़िए। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 144p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Ashre
Your Rating
Idrees Babar

Author: Idrees Babar

इदरीस बाबर

इदरीस बाबर का जन्म पाकिस्तान के शहर गुजरांवाला में 1973 में हुआ। इंजीनियरिंग कॉलेज, लाहौर से इंजीनियरिंग की तालीम हासिल की। वह अपनी तालीम के ज़माने में अहम अदबी रचनाओं का तर्जुमा करते रहे। 1992 में ‘फ़ुनून’ नामी रिसाले में छपने वाली उनकी अनोखी ग़ज़लों के सबब उन्हें शोहरत हासिल हुई और उनका पहला शेरी मजमूआ ‘यूँ ही’ सामने आते ही पढ़ने वालों की तवज्जोह का मरकज़ बन गया। इदरीस बाबर ने उर्दू शायरी में ‘अशरे’ के नाम से एक नई सिन्फ़ भी ईजाद करी है, जिसमें दस मिसरों की पाबन्दी करनी ज़रूरी है। और इसे भी तेज़ी से मक़बूलियत हासिल हो रही है। इदरीस बाबर का शायराना लहजा उर्दू की बिलकुल ताज़ा आवाज़ों में नया और अनोखा माना गया है। ‘अशरे’ के नाम से ही उनकी किताब उर्दू में प्रकाशित हो चुकी है।

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top