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Santhosh Aechikkanam Ki Ikkis Kahaniyan

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Santhosh Aechikkanam Ki Ikkis Kahaniyan

जिजीविषा सन्तोष एच्चिक्कानम की कहानियों में एक अहम अवयव है। मनुष्य मरणशील है। जीवन की इस प्राकृतिक सीमा के बारे में वह जानता है। फिर भी वह संघर्ष करता है। अपने अस्तित्व के लिए, अपने सपनों के लिए और अपनी अवांछित अवस्था को बदलने के लिए। उसका संघर्ष निरे भौतिक अर्थों में सिर्फ जीवित रहने तक सीमित नहीं है बल्कि इसके साथ-साथ जीवन की सार्थकता को सुनिश्चित करने और अपनी रचनात्मकता के जरिये नश्वरता से पार पाने में है। यह जीवन-संघर्ष एच्चिक्कानम की कहानियों में बहुविध रूप में व्यक्त हुआ है।

‘उभय ज़िन्दगी’ से लेकर ‘कोमाला’ तक, इन कहानियों में मानवीय जिजीविषा और बचे रहने की जद्दोजहद को सूक्ष्मता से उकेरा गया है। वस्तुतः ये कहानियाँ मनुष्य की मुक्ति की सम्भावनाओं की तलाश का प्रतिफल हैं। भिन्न-भिन्न कथनों-आख्यानों के रास्तों से होकर, परम्परा की भाव-धारा को धारण किये हुए ये कहानियाँ यथा आवश्यकता परिवर्तन को भी अपनाती चलती हैं।

मलयालम कहानी-साहित्य का एक अवश्य पठनीय संग्रह!

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Prabhakaran Hebbar Illath
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 162p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14 X 2
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Prabhakaran Hebbar Illath

Author: Prabhakaran Hebbar Illath

प्रो. प्रभाकरन हेब्बार इल्लत

प्रो. प्रभाकरन हेब्बार इल्लत पाणप्पुषा, कण्णूर, (केरल)के निवासी हैं। फ़िलहाल वे कालिकट विश्वविद्यालय, मलघुरम, केरल के हिन्दी विभाग में आचार्य हैं। आपकी अब तक 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें प्रमुख हैं—निराला के काव्य-निर्माण में वैदिक संस्कृति की भूमिका, राजभाषा हिन्दी : कुछ विचार, संस्कृति भाषा साहित्य, यह पृथ्वी हमारी भी है, पर्यावरण और समकालीन हिन्दी साहित्य, मानवाधिकार और समकालीन हिन्दी कविता, राजा रवि वर्मा : द कोलोसस ऑफ इंडियन पेंटिंग, (मौलिक); स्वातन्त्र्योत्तर हिन्दी कविता में मानवाधिकार, मानवाधिकार की राजनीति, प्रकृति और अन्तर्प्रकृति, हिन्दी का पर्यावरणीय साहित्य, हरित कविता, नेचुरल रिवरबरेशंस (सम्पादित); गंगा, नारायण गुरु की यात्रा, सिद्धार्थ (अनूदित) आदि। इनके अलावा हिन्दी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक शोध-आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आपने अब तक पाँच शोध परियोजनाएँ पूरी की हैं। उन्हें केरल हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार, यूजीसी शोध पुरस्कार, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय का हिन्दीतर हिन्दी लेखक पुरस्कार, बालकृष्ण गोयनका अनुवाद पुरस्कार, डॉ. एल. सुनीताबाई ज्ञान पुरस्कार, हिन्दी साहित्य शिरोमणि सम्मान, भारतीय उच्च शैक्षणिक संस्थान, शिमला की एसोसिएट फेलोशिप आदि से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected]

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