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Premchand Ka Chimta

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Premchand Ka Chimta

साहित्यकार जीवन के शब्दार्थ के भीतर क्रांतिमय विचार को प्रसार करने वाला होता है। साहित्य का लक्ष्य मानव के मन में परिवर्तन कर उसकी क्रियाओं को सकारात्मक रूप में परिवर्तित करते हुए जीवन को स्वस्थ दिशा प्रदान करना होता है। यह तभी संभव होता है, जब साहित्यकार संघर्षात्मक जीवन जीते हुए अपने अनुभवों को वाणीबद्ध करने का साहस करता है। शब्द निर्माता कवि विचार का निर्माता है। जिस भाषा में कवि या कलाकार नहीं जीता वैसी भाषा में नूतन विचारों को वहन करने की शक्ति नहीं रहती है। कवि के शब्द-अर्थ सामान्य लगने पर भी असामान्य होते हैं और उनमें नूतन कर्म की असामान्यता भी जुड़ी रहती है। भौतिक जीवन परिसर में संवेदनशील व्यक्ति के भीतर एक विशिष्ट भौतिक-वैचारिक ऊर्जा के रूप में ये शब्द-अर्थ अपनी भूमिका निभाने लगते हैं तो मानव की सामाजिक क्रियाएं नूतन आयाम ग्रहण करती हैं। यह वह वक्त है, जहाँ शब्द कर्म-शक्ति का रूप धारण करता है। साहित्यकार की भाषा कोरी काल्पनिक नहीं हो सकती है, वह जीवंत यथार्थ पर सुदृढ़ रहती है। यथार्थ के अधिग्रहण से मानव का लोकबोध विकसित होता है। इस आत्म-विकास को, स्वतंत्रता के क्षितिज का विस्तार, सत्य का अनुसंधान, सामाजिक विकास प्रक्रिया, मानवीयता का प्रसार, लोकतंत्रात्मकता का उन्नयन आदि के रूप में व्याख्यापित किया जा सकता है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 226p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 2
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Prabhakaran Hebbar Illath

Author: Prabhakaran Hebbar Illath

प्रो. प्रभाकरन हेब्बार इल्लत

प्रो. प्रभाकरन हेब्बार इल्लत पाणप्पुषा, कण्णूर, (केरल)के निवासी हैं। फ़िलहाल वे कालिकट विश्वविद्यालय, मलघुरम, केरल के हिन्दी विभाग में आचार्य हैं। आपकी अब तक 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें प्रमुख हैं—निराला के काव्य-निर्माण में वैदिक संस्कृति की भूमिका, राजभाषा हिन्दी : कुछ विचार, संस्कृति भाषा साहित्य, यह पृथ्वी हमारी भी है, पर्यावरण और समकालीन हिन्दी साहित्य, मानवाधिकार और समकालीन हिन्दी कविता, राजा रवि वर्मा : द कोलोसस ऑफ इंडियन पेंटिंग, (मौलिक); स्वातन्त्र्योत्तर हिन्दी कविता में मानवाधिकार, मानवाधिकार की राजनीति, प्रकृति और अन्तर्प्रकृति, हिन्दी का पर्यावरणीय साहित्य, हरित कविता, नेचुरल रिवरबरेशंस (सम्पादित); गंगा, नारायण गुरु की यात्रा, सिद्धार्थ (अनूदित) आदि। इनके अलावा हिन्दी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक शोध-आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आपने अब तक पाँच शोध परियोजनाएँ पूरी की हैं। उन्हें केरल हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार, यूजीसी शोध पुरस्कार, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय का हिन्दीतर हिन्दी लेखक पुरस्कार, बालकृष्ण गोयनका अनुवाद पुरस्कार, डॉ. एल. सुनीताबाई ज्ञान पुरस्कार, हिन्दी साहित्य शिरोमणि सम्मान, भारतीय उच्च शैक्षणिक संस्थान, शिमला की एसोसिएट फेलोशिप आदि से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected]

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