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Shahar Is Taraf Hai

Author: Shaheen Abbas
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Shahar Is Taraf Hai

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शाहीन अब्बास को पढ़ते समय उनके यहाँ मौजूद मुश्किल ख़यालों को रवानी से बयान कर देने की ख़ूबी जिस तरह उजागर होती है, वह एक ख़ुशगवार हैरत से दो-चार करवाती है। उनके कलाम में रिवायत और जदीदियत का ऐसा मिलन है जो आम तौर पर शायरी करने वाले दूसरे शायरों के यहाँ इस ख़ूबसूरती से कम ही अपनी जगह बना पाता है। शाहीन अब्बास की ग़ज़ल को पढ़े बग़ैर इस दौर की शेरी समझ को पूरी तरह ख़ुद में उतार पाना ना-मुमकिन-सा काम है। वह अपनी शायरी में शहर के बदलते हुए इनसान, जज़्बों की टूट फूट और सियासत को भी कई बार उस बारीक ऐनक से देखते हैं, जिसकी वजह से उनकी ग़ज़ल में मौजूद इशारे पढ़ने वाले पर ज़्यादा आसानी से वाज़ेह होते चले जाते हैं। वह पिछले तीस-पैंतीस बरस से ग़ज़ल की दुनिया में अपने अनोखे उस्लूब का जादू जगा रहे हैं और उनकी आवाज़ वक़्त के साथ-साथ और मज़बूत होती जा रही है। आसान ज़बान और दुश्वार ख़यालात से बुनी गई उनकी ग़ज़ल ‘इश्क़-ओ-आशिक़ी’ के अलावा वुजूद और ज़हन से जुड़े मसलों की तरफ़ भी बख़ूबी इशारे करती है। वह हर लिहाज़ से एक ना-क़ाबिल-ए-फ़रामोश शायर हैं, जिन्होंने अपने ज़माने में ही अपनी बेहतरीन शेरी और फ़िक्री दुनियाओं के नक़्शे बना लिए हैं। उनको पढ़ कर शेर कहने का सच्चा सलीक़ा सीखा जा सकता है। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 112p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Shaheen Abbas

Author: Shaheen Abbas

शाहीन अब्बास

शाहीन अब्बास का जन्म 29 नवंबर, 1965 को पंजाब के शहर शेखूपुरा में हुआ। उन्होंने लाहौर की यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से तालीम हासिल की और पेशे से इंजीनियर बने, मगर उनका तख़्लीक़ी रुझान शुरू से अदब और शायरी की तरफ़ रहा। 1980 के आसपास उन्होंने शायरी करनी शुरू की और धीरे-धीरे उनकी आवाज़ अदबी हल्क़ों में पहचानी जाने लगी। 1998 में उनका पहला शायरी संग्रह ‘तहय्युर’ प्रकाशित हुआ, जिसमें ग़ज़लें शामिल थीं। इसके बाद ‘वाबस्ता’ (2002), ‘ख़ुदा के दिन’ (2009), ‘मुनादी’ (2013) और ‘दरस धारा’ (2014) जैसी किताबें सामने आईं, जबकि ‘गलियों गलियों’ नामी शेरी मजमूए ने उनके काव्य-सफ़र को और विस्तार दिया। शायरी के साथ-साथ उनका एक उपन्यास ‘पारे शुमारे’ और अफ़सानों का एक संग्रह भी सामने आया। 1990 के बाद से शाहीन अब्बास पाकिस्तान के उन अहम शायरों में गिने जाते हैं, जिनकी रचनाओं में अपने दौर की संवेदना और सोच की झलक साफ़ मिलती है।

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