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Dard Aashob

Author: Ahmed Faraz
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Dard Aashob

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आज फिर करते हो किस ज़ोम प’ ज़ख़्मों का शुमार

सरफिरो! वादी-ए-पुरख़ार में ये तो होगा

क्यूँ निगाहों में है अफ़सुर्दा चराग़ों का धुवाँ

आरज़ू-ए-लबो-रुख़्सार में ये तो होगा

एक से एक कड़ी मंज़िले-जाँ आएगी

रहगुज़ारे-तलबे-यार में ये तो होगा

 

होंठ सिल जाएँ मगर जुरअते-इज़्हार रहे

दिल की आवाज़ को मद्धम न करो दीवानो!

ढल चुकी रात तो अब कुहर भी छट जाएगी

अब भी उम्मीद की लौ कम न करो दीवानो!

आँधियाँ आया ही करती हैं हरिक हब्स के बाद

गुलशुदा शम्ओं का मातम न करो दीवानो! 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 136p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Author: Ahmed Faraz

अहमद फ़राज़

अहमद फ़राज़ का जन्म 12 जनवरी, 1931 को नौशेहरा (पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त) में हुआ। उनका पूरा नाम फ़राज़ अहमद और तख़ल्लुस फ़राज़ है। उन्होंने 1954 में पेशावर विश्वविद्यालय से उर्दू और फ़ारसी में एम.ए. किया। उनकी मादरी ज़बान पश्तो थी, मगर उन्होंने अपनी काव्य-रचनाओं के लिए उर्दू ज़बान का चुनाव किया। वह जदीद उर्दू ग़ज़ल के मशहूर शायर हैं। फ़िराक़ गोरखपुरी के अल्फ़ाज़ में, फ़राज़ की शायरी दौर-ए-हाज़िर की कोमल मानसिक प्रतिक्रिया का सच्चा नमूना है।

उनकी किताबों में ‘तन्हा तन्हा’, ‘दर्द आशोब’, ‘नायाफ़्त’, ‘जानाँ जानाँ’, ‘मेरे ख़्वाब रेज़ा रेज़ा’, ‘बेआवाज़ गली कूचों में’, और

‘ना-बीना शहर में आईना’ जैसी मशहूर किताबें शामिल हैं।

अहमद फ़राज़ को उनकी बे-मिसाल शायरी और अदब की ख़िदमत के लिए आदमजी अवार्ड (पाकिस्तान), फ़िराक़ गोरखपुरी सम्मान (भारत), टाटा अवार्ड जमशेदपुर (भारत) और हिलाल-ए-इम्तियाज़ (पकिस्तान) से नवाज़ा गया। 

25 अगस्त, 2008 में उनका निधन हुआ।

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