Facebook Pixel

Kavita Se Batkahi

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
25% Off
Out of stock
SKU
Kavita Se Batkahi

कविता का सम्बन्ध समय, समाज और मनुष्य से है, लेकिन कविताएँ अपनी प्रकृति, संरचना और बुनावट में स्वायत्त होती हैं। कविता में यह आबद्ध होकर भी स्वतंत्र होना किस तरह सम्भव होता है? इसको परिभाषित करना सृजनात्मक प्रक्रिया के विरुद्ध जाना होगा। ऐसा करना अनिवार्य रूप से गतिशील प्रक्रिया के तहत ही सम्भव हो सकता है। कविता के बारे में विचार करते हुए हम एक सरल-सी बात से शुरू कर सकते हैं, लगभग विज्ञान की भाषा में कि जब दो या दो से अधिक भिन्न गुण वाली वस्तुएँ मिलकर एक तीसरी चीज़ बनाती हों, तो वहाँ कविता होगी। कविता के भी अवयव होते हैं। दृश्य-अदृश्य, अन्तर-बाह्य, मनुष्य-प्रकृति के संयोग से ही कविता बनती है। जैसे दो पत्थरों के रगड़ने से आग निकलती है। जब आग पैदा होती है तो प्रत्येक पत्थर का अस्तित्व दूसरे के महत्त्व को स्थापित करता है। किसी एक को अधिक और दूसरे को कम महत्त्वपूर्ण नहीं माना जा सकता। हर एक का अस्तित्व अपने साथ-साथ दूसरे को प्रकाशित करता है। इसमें स्वयं का होना और स्वयं से मुक्त होना, दोनों ही शामिल है। कविता के प्रसंग में भी यही बात सिद्ध होती है।

कविता के बहाने साहित्य-मात्र को देखने-समझने का सलीका सिखाने वाली एक उल्लेखनीय कृति। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 226p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14 X 2
Write Your Own Review
You're reviewing:Kavita Se Batkahi
Your Rating
Prabhakaran Hebbar Illath

Author: Prabhakaran Hebbar Illath

प्रो. प्रभाकरन हेब्बार इल्लत

प्रो. प्रभाकरन हेब्बार इल्लत पाणप्पुषा, कण्णूर, (केरल)के निवासी हैं। फ़िलहाल वे कालिकट विश्वविद्यालय, मलघुरम, केरल के हिन्दी विभाग में आचार्य हैं। आपकी अब तक 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें प्रमुख हैं—निराला के काव्य-निर्माण में वैदिक संस्कृति की भूमिका, राजभाषा हिन्दी : कुछ विचार, संस्कृति भाषा साहित्य, यह पृथ्वी हमारी भी है, पर्यावरण और समकालीन हिन्दी साहित्य, मानवाधिकार और समकालीन हिन्दी कविता, राजा रवि वर्मा : द कोलोसस ऑफ इंडियन पेंटिंग, (मौलिक); स्वातन्त्र्योत्तर हिन्दी कविता में मानवाधिकार, मानवाधिकार की राजनीति, प्रकृति और अन्तर्प्रकृति, हिन्दी का पर्यावरणीय साहित्य, हरित कविता, नेचुरल रिवरबरेशंस (सम्पादित); गंगा, नारायण गुरु की यात्रा, सिद्धार्थ (अनूदित) आदि। इनके अलावा हिन्दी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक शोध-आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आपने अब तक पाँच शोध परियोजनाएँ पूरी की हैं। उन्हें केरल हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार, यूजीसी शोध पुरस्कार, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय का हिन्दीतर हिन्दी लेखक पुरस्कार, बालकृष्ण गोयनका अनुवाद पुरस्कार, डॉ. एल. सुनीताबाई ज्ञान पुरस्कार, हिन्दी साहित्य शिरोमणि सम्मान, भारतीय उच्च शैक्षणिक संस्थान, शिमला की एसोसिएट फेलोशिप आदि से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected]

Read More
New Releases
Back to Top