प्रस्तुत पुस्तक ‘झरना’ में प्रेम के विविध अनुभवों का जीवन्त वर्णन है। ‘प्रेम’ से उत्पन्न निराशा, बेवफाई की वेदना, वियोग की तड़प आदि के अलावा ‘झरना’ में लोक मंगल की भावना और दीन-दुखी और दलितों के दुःख के अन्त में कामना भी है जो प्रेम को उदार बनाती है। यह सूफियों अथवा विवेकानन्द की प्रेम सम्बन्धी अवधारणाओं की भाँति कविताओं के देश का विस्तार भी है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2024 |
| Edition Year | 2024, Ed. 1st |
| Pages | 79p |
| Publisher | Lokbharti Prakashan |
| Dimensions | 22 X 14.5 X 1 |