Pratinidhi Kavitayen : Suryakant Tripathi 'Nirala'

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Pratinidhi Kavitayen : Suryakant Tripathi 'Nirala'
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दुर्धर्ष भाग्य और क्षुद्र समय से आजीवन घिरे रहे महा-कवि और महा-प्राण मनुष्य निराला ने हिन्दी कविता को अपने ही हाथों वह दे दिया जिसे अर्जित करने में युगों की प्रतिभा और शक्ति व्यय हो जाती है। छायावाद के दौर में ही उन्होंने एक कदम बढ़कर मुक्त छन्द में यथार्थवादी कविता को सम्भव किया तो स्वतन्‍त्रता आन्दोलन के दौरान और आजादी के बाद भारतीय राजनीति तथा समाज की स्थितियों को लक्षित कर कविताएँ और उपन्यासों की रचना भी की। ‘सरोज स्मृति’ और ‘राम की शक्तिपूजा’ जैसी कविताओं से उन्होंने कविता की सामर्थ्य के नए मानक गढ़े, तो गीतों में परम्परा, प्रयोग और लोकचेतना के असंख्य अर्थसघन बिम्ब अगली पीढ़ियों के लिए छोड़े। लेकिन यह नवीनता और प्रयोगधर्मिता किसी मामूली चमत्कार-प्रियता का परिणाम नहीं थी, यह निश्चय ही दुख के ताप से नित नूतन होते उनके मन का स्वाभाविक प्रवाह रहा होगा जो क्षणों की अवधि में वर्षों-दशकों को लाँघता चलता है।

उनकी प्रतिनिधि कविताओं के इस संकलन में प्रयास किया गया है कि पाठक निराला के विराट कृतित्व के कुछ सबसे दीप्तिमान शिखरों का साक्षात्कार कर सके।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2021
Edition Year 2021, Ed. 1st
Pages 136p
Translator Not Selected
Editor Vivek Nirala
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 17.5 X 12 X 1
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Suryakant Tripathi 'Nirala'

Author: Suryakant Tripathi 'Nirala'

सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

निराला का जन्म वसन्त पंचमी, 1896 को बंगाल के मेदिनीपुर ज़िले के महिषादल नामक देशी राज्य में हुआ। निवास उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़ि‍ले के गढ़ा कोला गाँव में। शिक्षा हाईस्कूल तक ही हो पाई। हिन्दी, बांग्ला, अंग्रेज़ी और संस्कृत का ज्ञान आपने अपने अध्यवसाय से स्वतंत्र रूप में अर्जित किया।

प्राय: 1918 से 1922 ई. तक निराला महिषादल राज्य की सेवा में रहे, उसके बाद से सम्पादन, स्वतंत्र लेखन और अनुवाद-कार्य। 1922-23 ई. में ‘समन्वय’ (कलकत्ता) का सम्पादन। 1923 ई. के अगस्त से ‘मतवाला’ मंडल में। कलकत्ता छोड़ा तो लखनऊ आए, जहाँ गंगा पुस्तकमाला कार्यालय और वहाँ से निकलनेवाली मासिक पत्रिका ‘सुधा’ से 1935 ई. के मध्य तक सम्बद्ध रहे। प्राय: 1940 ई. तक लखनऊ में। 1942-43 ई. से स्थायी रूप से इलाहाबाद में रहकर मृत्यु-पर्यन्त स्वतंत्र लेखन और अनुवाद-कार्य। पहली प्रकाशित कविता : ‘जन्मभूमि’ (‘प्रभा’, मासिक, कानपुर, जून, 1920)। पहली प्रकाशित पुस्तक : ‘अनामिका’ (1923 ई.)।

प्रमुख कृतियाँ : कविता-संग्रह : ‘आराधना’, ‘गीतिका’, ‘अपरा’, ‘परिमल’, ‘गीतगुंज’, ‘तुलसीदास’, ‘कुकुरमुत्ता’, ‘बेला’, ‘अर्चना’, ‘नए पत्ते’, ‘अणिमा’, ‘रागविराग’, ‘सांध्य काकली’, ‘असंकलित रचनाएँ’। उपन्यास : ‘बिल्लेसुर बकरिहा’, ‘अप्सरा’, ‘अलका’, ‘कुल्लीभाट’, ‘प्रभावती’, ‘निरुपमा’, ‘चोटी की पकड़’, ‘भक्त ध्रुव’, ‘भक्त प्रहलाद’, ‘महाराणा प्रताप’, ‘भीष्म पितामह’, ‘चमेली’, ‘काले कारनामे’, ‘इन्दुलेखा’ (अपूर्ण)। कहानी-संग्रह : ‘सुकुल की बीवी’, ‘लिली’, ‘चतुरी चमार’, ‘महाभारत’, ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’। निबन्ध-संग्रह : ‘प्रबन्ध प्रतिमा’, ‘प्रबन्ध पद्म’, ‘चयन’, ‘चाबुक’, ‘संग्रह’। संचयन : ‘दो शरण’, ‘निराला संचयन’’, ‘निराला रचनावली’।

निधन : 15 अक्टूबर, 1961

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