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Kinare Se Kinare Tak

Author: Rajendra Yadav
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Kinare Se Kinare Tak

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‘जहाँ लक्ष्मी कैद है’, ‘छोटे-छोटे ताजमहल’, ‘किनारे से किनारे तक’ में राजेन्द्र यादव की ही नहीं, हिन्दी-कहानी वयस्क हुई है और अनुभव की अधिक गहरी तहों का उद्घाटन करती है।

किनारे से किनारे तक की अन्तर्यात्रा पाठक को ऐसे उदात्त सत्य से साक्षात्कार कराती है, जिसके लिए वह तैयार नहीं है। प्रतीक्षा, पुराने नाले पर नया फ़्लैट, बिरादरी बाहर, भय कहानियाँ जिस गहरे रचनात्मक सरोकार से आईं हैं, वही राजेन्द्र यादव को विशिष्ट बनाता है।

ये कहानियाँ शिल्प, भाषा और अपने बहुआयामी कथ्य के कारण ही बेजोड़ हैं। कथाकार राजेन्द्र यादव की क्षमताओं और प्रभाव को समझने के लिए इन्हें पढ़ना आवश्यक है।

दर्जनों बार उद्धृत, अनुवादित और प्रायः हर कहानी-समीक्षा में चर्चित इन कहानियों को पढ़ना हिन्दी की उन्नत कहानियों से परिचय प्राप्त करना है

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 184p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Rajendra Yadav

Author: Rajendra Yadav

राजेन्द्र यादव

जन्म : 28 अगस्त, 1929; आगरा।

शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), 1951; आगरा विश्वविद्यालय।

प्रकाशित पुस्तकें : ‘देवताओं की मूर्तियाँ’, ‘खेल-खिलौने’, ‘जहाँ लक्ष्मी कैद है’, ‘अभिमन्यु की आत्महत्या’, ‘छोटे-छोटे ताजमहल’, ‘किनारे से किनारे तक’, ‘टूटना’, ‘ढोल और अपने पार’, ‘चौखटे तोड़ते त्रिकोण’, ‘वहाँ तक पहुँचने की दौड़’, ‘अनदेखे अनजाने पुल’, ‘हासिल और अन्य कहानियाँ’, ‘श्रेष्ठ कहानियाँ’, ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘सारा आकाश’, ‘उखड़े हुए लोग’, ‘शह और मात’, ‘एक इंच मुस्कान’ (मन्नू भंडारी के साथ), ‘मंत्र-विद्ध और कुलटा’ (उपन्यास); ‘आवाज तेरी है’ (कविता-संग्रह); ‘कहानी : स्वरूप और संवेदना’, ‘प्रेमचन्द की विरासत’, ‘अठारह उपन्यास’, ‘काँटे की बात’ (बारह खंड), ‘कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति’, ‘उपन्यास : स्वरूप और संवेदना’ (समीक्षा-निबन्ध-विमर्श); ‘वे देवता नहीं हैं’, ‘एक दुनिया : समानान्तर’, ‘कथा जगत की बागी मुस्लिम औरतें’, ‘वक़्त है एक ब्रेक का’, ‘औरत : उत्तरकथा’, ‘पितृसत्ता के नए रूप’, ‘पच्चीस बरस : पच्चीस कहानियाँ’, ‘मुबारक पहला क़दम’ (सम्पादन); ‘औरों के बहाने’ (व्यक्ति-चित्र); ‘मुड़-मुडक़े देखता हूँ’... (आत्मकथा); ‘राजेन्द्र यादव रचनावली’ (15 खंड)।

प्रेमचन्द द्वारा स्थापित कथा-मासिक ‘हंस’ के अगस्त, 1986 से 27 अक्टूबर, 2013 तक सम्पादन। चेख़व, तुर्गनेव, कामू आदि लेखकों की कई कालजयी कृतियों का अनुवाद।

निधन : 28 अक्टूबर, 2013

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