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Kavya Ke Roop

Author: Gulab Rai M.A.
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Kavya Ke Roop

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‘काव्य’ शब्द संस्कृत में गद्य और पद्य दोनों का द्योतक माना गया है। गुलाबराय इसी ‘गद्य-पद्य’ के साहित्यिक स्वरूप पर विचार करते हुए ‘काव्य के रूप’ में साहित्यालोचन के सिद्धान्तों की चर्चा करते हैं। संस्कृत साहित्य की परम्परा में मूलतः ‘काव्य’ का विभाजन श्रव्य और दृश्य इन्हीं दो रूपों में होता आया है; किन्तु साहित्यिक विधाओं की आपसी विभाजन रेखा को परिभाषित करना और उनके बीच के अन्तर को उद्घाटित करना अत्यन्त सूक्ष्म कार्य है जिसे इस पुस्तक में थोड़ी स्थूलता प्रदान की गई है।

गुलाबराय अपने विचारों को साहित्य की भारतीय और पाश्चात्य परम्परा के सैद्धान्तिक निकष पर परखते हुए ‘काव्य के रूप’ में न केवल साहित्यिक विधाओं के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करते हैं बल्कि विधाओं के विकासक्रम के संक्षिप्त इतिहास पर भी दृष्टि डालते हैं। दृष्टिपूर्ण ढंग से ‘काव्य के रूप’ पुस्तक का आरम्भ, मध्य और समापन युक्तियुक्त प्रासंगिकता को सृजित करता है, जो आलोचना के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक धरातल पर साहित्य के स्वरूप के विविध पक्षों को अपने में समेटे हुए है। साहित्य के विधागत स्वरूप और उसके विकासक्रम से परिचय करानेवाला यह प्राथमिक कार्य गुलाबराय द्वारा साहित्यालोचन के सृजनात्मक अवदान को प्रतिफलित करता है, जो इस पुस्तक को साहित्य के मूल्यांकन के स्तर पर अधिक समीचीन बनाएगा।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 248p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Author: Gulab Rai M.A.

गुलाबराय एम.ए.

गुलाबराय एम.ए. का जन्म 17 जनवरी, 1888 को  इटावा, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा मैनपुरी में हुई। उन्होंने सेंट जॉन्स कॉलेज से दर्शनशास्त्र में एम.ए. और आगरा कॉलेज से एल.एल.बी. किया। फिर छतरपुर चले गए और वहाँ के महाराज के निजी सचिव हो गए। वहाँ दीवान और चीफ़ जज भी रहे। छतरपुर महाराज के निधन के बाद वापस आगरा गए। वहाँ सेंट जॉन्स कॉलेज में अध्यापन किया। आगरा विश्वविद्यालय ने 1957 में उन्हें डी.लिट. की उपाधि से सम्मानित किया।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—नवरस, हिन्दी साहित्य का सुबोध इतिहास, हिन्दी नाट्य विमर्श, काव्य के रूप, सिद्धान्त और अध्ययन (आलोचना); कर्तव्य शास्त्र, तर्क शास्त्र, शान्ति धर्म, पाश्चात्य दर्शनों का इतिहास, भारतीय संस्कृति की रूपरेखा (दर्शन); प्रबन्ध प्रभाकर, मेरे निबन्ध, मेरी असफलताएँ, मेरे मानसिक उपादान (निबन्ध);  विज्ञान वार्ता, बाल प्रबोध (बाल-साहित्य); सत्य हरिश्चन्द्र, भाषा-भूषण, कादम्बरी कथा-सार (सम्पादन)।

13 अप्रैल, 1963 को उनका निधन हुआ।

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