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Khwaabgah Mein Ret

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Khwaabgah Mein Ret

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उर्दू शायरी में जिन नए शायरों के दस्तख़त बहुत मज़बूती के साथ अपनी जगह बनाते नज़र आते हैं, उनमें मुबश्शिर सईद का नाम ख़ास तौर पर शामिल है। वह कहीं सूफ़ियाना रक़्स के धीमेपन की तरह पढ़ने वाले को सुकून बख़्शते हैं तो कहीं किसी भड़कते हुए शोले की तरह अपनी लपट में पढ़ने वाले को लपेटने का हुनर रखते हैं। ‘ख़्वाबगाह में रेत’ मुबश्शिर सईद का पहला मजमूआ है और इसने अपनी मुनफ़रिद शैली की बुनियाद पर बहुत कम समय में शोहरत की बुलन्दियाँ तय की हैं। वह धीमे लहजे के शायर हैं और ग़ज़ल के हुनर पर गहरी पकड़ रखते हैं। उनकी शायराना सलाहियत जहाँ पढ़ने वाले को एक तरफ़ उर्दू की नई ग़ज़ल के चेहरे से वाक़िफ़ कराती है, वहीं इस सिन्फ़-ए-सुख़न की इक्कीसवीं सदी में बदलती हुई शक्ल से भी आशना करवाती है। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 96p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 0.5
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Mubashshir Saeed

Author: Mubashshir Saeed

मुबश्शिर सईद

मुबश्शिर सईद का जन्म पाकिस्तान के शहर मुल्तान में 1983 में हुआ। वह इसी शहर के निवासी रहे हैं। 2006 से उनके शेरी सफ़र का आग़ाज़ हुआ और 2016 में उनका पहला शेरी मजमूआ ‘ख़्वाबगाह में रेत’ के नाम से प्रकाशित हुआ। ये किताब इतनी मक़बूल हुई कि बहुत जल्द इसका दूसरा संस्करण प्रकाशित हुआ और मुबश्शिर सईद अदब में अपनी नई और मुनफ़रिद आवाज़ की वजह से पहचाने जाने लगे। यहाँ तक कि उर्दू के बेहद अहम अदीब और आलोचक शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी ने उनकी ग़ज़लों को ‘बशारत और सआदत वाली ग़ज़लें’ कह कर सराहा। मुबश्शिर सईद का ये रचनात्मक सफ़र तब से जारी है और वह मुसलसल अपने अलग और बेहतरीन उस्लूब से पढ़ने वालों के दिल में अपनी शायरी की बदौलत जगह बना रहे हैं।

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