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Gadiwalon Ka Katra

Translator: Chandrabhal Jauhari
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Gadiwalon Ka Katra

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गाड़ीवालों का कटरा जारकालीन रूस की पृष्ठभूमि में वेश्यावृत्ति की ज्वलन्त समस्या का हृदयविदारक चित्र प्रस्तुत करता है। कुप्रिन सामाजिक बीमारियों को छिपाने में विश्वास नहीं रखते थे और मानते थे कि भयंकर से भयंकर सत्य को उजागर करना मनुष्य के हित में है। इसी कारण उन्होंने इस उपन्यास में वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर स्त्रियों की दारुण कथा के जरिये मानव-समाज के अकल्पनीय पतन का ऐसा हाल बयान किया जिसे वेश्यावृत्ति के विषय पर पहला और अन्तिम ईमानदार काम माना जाता है। इस उपन्यास ने प्रेमचन्द को भी गहरे प्रभावित किया था।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Chandrabhal Jauhari
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 422p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2.5
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Aleksandr Kuprin

Author: Aleksandr Kuprin

अलेक्सांद्र कुप्रिन

अलेक्सांद्र कुप्रिन (1870-1938) का जन्म रूस में हुआ था। साधारण लोगों ​का जीवन उनकी रचनाओं के केन्द्र में है। तोल्स्तोय ने उन्हें चेख़ॅव का उत्तराधिकारी घोषित किया था। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘मलोच’, ‘ओलेस्या’, ‘रत्न-कंगन’ आदि हैं। सन् 1919 में बोल्शेविक क्रान्ति के दौरान वे देश छोड़कर फ्रांस चले गए और अगले 17 साल वहीं रहे। 1937 में, अपनी मृत्यु से केवल एक वर्ष पहले, वह रूस वापस लौटे। आज कुप्रिन रूस के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखकों में से हैं।

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