Fahmida Riaz
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फ़हमीदा रियाज़
फ़हमीदा रियाज़ का जन्म 1946 में उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ में हुआ। फ़हमीदा रियाज़ ने अपनी शायरी में बेबाक लहजा अपनाया और बहुत से ऐसे विषयों को बड़ी सहजता के साथ अपनी शायरी में छुआ, जिसे उनसे पहले नज़रअन्दाज़ किया जाता रहा था। फ़हमीदा रियाज़ ने शायरी के साथ कहानियाँ भी लिखीं और आलमी अदब के बहुत से लेखकों की किताबों का उर्दू में तर्जुमा भी किया, जिनमें नजीब महफ़ूज़ और मार्गरेट एटवुड के नाम ख़ास तौर पर लिए जा सकते हैं। वह ज़िया-उल-हक़ के दौर-ए-हुकूमत में भारत आ गई थीं और यहाँ कई वर्ष रह कर ज़िया-उल-हक़ के इन्तिक़ाल के बाद वापस पाकिस्तान लौटीं।
फ़हमीदा रियाज़ की क़ाबिल-ए-ज़िक्र किताबों में ‘पत्थर की ज़बान’, ‘आदमी की ज़िन्दगी’ (शायरी), ‘ख़त-ए-मरमूज़’ (कहानियाँ) और ‘सब लाल-ओ-गुहर’ (कुल्लियात-ए-शायरी) शामिल हैं। उर्दू नज़्म में फ़हमीदा रियाज़ का नाम अपनी अनोखी शायराना ज़बान और
बे-साख़्तगी के लिए ख़ास तौर पर मशहूर हुआ है।
उन्हें अदबी ख़िदमात के लिए पकिस्तान में प्राइड ऑफ़ परफ़ॉरमेंस जैसे बड़े सम्मान से नवाज़ा गया।
21 नवम्बर, 2018 को 72 वर्ष की उम्र में उनका इन्तिक़ाल हुआ।



