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Bharat Ke Dwandwa

Author: Rajendra Gahlot
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Bharat Ke Dwandwa

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‘भारत के द्वंद्व : आज़ादी, आपातकाल और अमृतकाल’ पुस्तक उस चेतना की आवाहक है जिसमें औपनिवेशिक दुष्प्रभावों को दूर कर आत्मनिर्भर, सशक्त और समावेशी भारत को साकार करने का संकल्प निहित है।

भारत राष्ट्र के हिन्दुओं और मुसलमानों में धार्मिक और परम्परागत विविधता पहले से विद्यमान थी। इसके बावजूद ये साथ-साथ रहे, इनकी सामूहिक शक्ति ने 1857 के विद्रोह में साम्राज्यवादी अंग्रेजों को बड़ी चुनौती दी। उनसे निपटने के लिए अंग्रेजों ने धर्म-आधारित अलगाव को योजनाबद्ध ढंग से बढ़ाया। कुछ इतिहासकारों का मानना है, चूँकि अंग्रेजों ने भारत की सत्ता मुगलों से छीनी थी, इसलिए शुरुआती दौर में मुसलमान-समुदाय अंग्रेजों का विरोधी रहा। उसने अंग्रेजों द्वारा भारत में स्थापित शिक्षा-व्यवस्था को अन्य समुदायों की तरह मुक्तकंठ से नहीं अपनाया। परिणामस्वरूप भारत में स्थापित अंग्रेजी व्यवस्था में मुसलमानों की भागीदारी काफी कम रही। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और सत्ता तक पहुँच प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई और असमानता का एक आधार तैयार हुआ। इसी असमानता को साम्प्रदायिकता का रंग देकर अंग्रेजों ने ‘फूट डालो शासन करो’ की नीति लागू की। दुर्भाग्यवश ऐसी नीतियाँ सिर्फ उपनिवेश-काल तक सीमित नहीं रहीं बल्कि उनकी अमानवीय व्याप्ति भारत-विभाजन, कश्मीर एवं सिन्धु जल-विवाद, स्वतंत्र भारत की प्रारम्भिक आर्थिक नीतियों और आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में लम्बे समय तक बनी रही।

भारत आज ऐतिहासिक चेतना के पुनर्जागरण के एक नये दौर से गुजर रहा है जहाँ विविधता को विभाजक नहीं बल्कि संयोजक शक्ति मानकर भारतीय लोकतंत्र, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में अमृतकाल का लक्ष्य अतीत की विभाजनकारी राजनीति से सीख लेकर एकात्म मानवतावाद की ओर बढ़ना और सहभागितापूर्ण विकास के जरिये राष्ट्र के आत्मनिर्भर, सशक्त और समावेशी भविष्य को साकार करना है। यह पुस्तक, इन्हीं विचारों को शब्द-रूप में प्रस्तुत करती है।  

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 224p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 19.5 X 13 X 1.5
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Rajendra Gahlot

Author: Rajendra Gahlot

राजेन्द्र गहलोत

राजेन्द्र गहलोत का जन्म 8 नवम्बर, 1950 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ। बाल्यावस्था से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे जहाँ से उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रबोध, अनुशासन और मानवीय संवेदना का विकास हुआ। आपातकाल के दौरान वे मीसा-बन्दी रहे और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र-सेनानी के रूप में उन्होंने साहसिक भूमिका निभाई। सार्वजनिक जीवन में प्रवेश से पूर्व वे एक समर्पित शिक्षक रहे जिससे उनके विचारों में नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना और गहरी हुई। जनसेवा के क्षेत्र में उन्होंने जल-संरक्षण, जल-प्रबन्धन और जनहितकारी जल-अभियानों को जन-आन्दोलन का रूप दिया जिससे उन्हें ‘जलभागीरथ’ के रूप में विशेष पहचान मिली। वे पहली बार 1990 में सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र, राजस्थान से भारतीय जनता पार्टी के विधायक चुने गए। बाद में राजस्थान-सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने जनकल्याण की नीतियों को मानवीय दृष्टिकोण से क्रियान्वित किया। अपने सुदीर्घ सार्वजनिक जीवन में वे अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हुए हैं। फिलहाल वे राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। 

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