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Pratinidhi Kavitayein : Ravindra Bharati

Author: Ravindra Bharti
Editor: Jyotish Joshi
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Pratinidhi Kavitayein : Ravindra Bharati

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रवीन्द्र भारती की कविताएँ साधारण लोगों और चीज़ों की साधारणता को इस तरह आलोकित करती हैं कि वे उत्सवधर्मी और बड़बोली असाधारणताओं के सम्मुख न सिर्फ़ उनका विकल्प बल्कि उनसे ज़्यादा गरिमापूर्ण और अर्थवान लगने लगती हैं। बहुत नज़दीक और बहुत जाने-पहचाने हमारे संसार में ही उनकी कविता ऐसे बिन्दुओं को चिह्नित करती चलती है जहाँ हम एक मनुष्य के रूप में सहजभाव से रह सकते हैं। सरल और आमफ़हम शब्दावली में अनुभूति के सघन क्षणों को कविता में ले आना रवीन्द्र भारती की विशेषता है, जिसे अपने देशज बोध के साथ वे एक अविस्मरणीय दृश्य के रूप में पाठक के सामने कर देते हैं। आज के काव्य-जगत में उनकी कविताओं को पढ़ना कविता की एक अत्यन्त प्राकृतिक भूमि से साक्षात्कार करना है, वह भूमि जहाँ कुछ भी ऐसा नहीं जो कविता न हो सके। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Jyotish Joshi
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 152p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 1
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Ravindra Bharti

Author: Ravindra Bharti

रवीन्द्र भारती

आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘जड़ों की आख़िरी पकड़ तक’, ‘धूप के और क़रीब’, ‘यह मेरा ही अंश है’, ‘नचनिया’, ‘नाभिनालऔर जगन्नाथ का घोड़ा’ (कविता-संग्रह); ‘कम्पनी उस्ताद’, ‘फूकन का सुथन्ना’, ‘जनवासा’, ‘अगिन तिरियाऔर कौआहंकनी’ (नाटक)।

उनकी कविताएँ कई भाषाओं में अनूदित हुई हैं। नाटकों के भी अनेक मंचन हुए हैं जिन्हें रंगकर्मियों और दर्शकों, सभी ने सराहा है। कौआहंकनीनाटक पर फिल्म भी बनी है।

सम्मान और पुरस्कार : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद का विशिष्ट साहित्य सेवा सम्मान, दिनकर सम्मान, मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार से सीनियर फेलोशिप।

सम्पर्क : ravinderbharti12@yahoo.com

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