Dhoop Ke Aur Kareeb

Poetry
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Dhoop Ke Aur Kareeb
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रवीन्द्र भारती अतिपरिचित आत्मीय परिवेश में जनसंवेदना और वस्तु-संवेदना के सशक्त और महत्त्वपूर्ण कवि हैं। उनका परिवेश बाहरी और भीतरी दोनों है। दोनों में लगातार आवाजाही लगी रहती है। अपने परिवेश को भीतर और बाहर से महसूस करने, संवेदना की अपनी एक पट्टी बनाने की यह भोक्ता-स्थिति, जो नए आख्यानों का मज़ा देती है, संक्रमण काल के अन्तिम दौरवाली कविताओं की ख़ास पहचान है। इस दौर में एक असफल होते जनतंत्र में मुहावरों की बड़बोलती कविता से मोहभंग की सूचना जिन थोड़े से कवियों में मिलती है, रवीन्द्र भारती उनमें प्रमुख हैं।

धूप के और क़रीब एक स्मरणीय संग्रह है। रवीन्द्र भारती एक स्मृति-सम्पन्न कवि हैं। ग्रामीण परिवेश के जितने सरल और अर्थवान बिम्ब रवीन्द्र भारती के पास हैं, उतने किसी समकालीन कवि के पास शायद नहीं। उनकी कविताओं में जितने दृष्टान्त हैं—एक्सपोजर कोटि के नहीं हैं। वह अमानवीय और निरन्तर निष्ठुर हो रही व्यवस्था में रिसते आदमी की गाथा हैं। इससे निजात के आसार नहीं खोए हैं रवीन्द्र ने। विश्वास के साँचे में कई तरह के अब तक नहीं आए हुए पात्र, उनकी कविता में आते हैं। कवि का पूरा एक अन्तरंग संसार अपने मौलिक रंगों में यहाँ मौजूद है।

रवीन्द्र भारती की प्रेम सम्बन्धी कविताएँ भी घरेलू अन्तरंगता से सराबोर हैं। उनकी भाषा और कविताओं का लहज़ा बिलकुल बोलचाल का है, और है यथार्थवादी रुझान का ताज़ापन। रवीन्द्र भारती भरोसे के कवि हैं। इनकी कविताओं में भूली हुई चीज़ों को याद दिलाने की, और भीतर सोई हुई आशाओं को जगाने की जो शक्ति दीखती है, वह अपूर्व है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1986
Edition Year 2000, Ed. 2nd
Pages 108p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
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Editorial Review

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Ravindra Bharti

Author: Ravindra Bharti

रवीन्द्र भारती

 

जन्म : 1951

प्रकाशित कृतियाँ—कविता-संग्रह : ‘जड़ों की आख़‍िरी पकड़ तक’, ‘धूप के और क़रीब’, ‘यह मेरा ही अंश है’, ‘नचनिया’; नाटक : ‘कम्पनी उस्ताद’, ‘फूकन का सुथन्ना’, ‘जनवासा’, ‘अगिन तिरिया’ और ‘कौआहंकनी’ (फ़‍िल्म निर्माण)।

कविताएँ कई भाषाओं में अनूदित।

सम्मान/पुरस्कार : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद से ‘विशिष्ट साहित्य सेवा सम्मान’, मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार से सीनियर फ़ेलोशिप।

1975 में आपातकाल के दौरान कविता पर एक वर्ष का कारावास।

सम्‍पर्क : ravinderbharti12@yahoo.com

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