Facebook Pixel

Mrigtrishna

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
As low as ₹760.75 Regular Price ₹895.00
15% Off
In stock
SKU
Mrigtrishna

- +
Share:
Codicon

वह खिल-खिलाकर हँस पड़ी। रात के उस शांत वातावरण में उसकी हँसी मूर्त संगीत की तरह गंगा की लहरों पर फैल गयी। वह बोली—“उदय, तुम इतने भोले हो कि कभी-कभी मुझे अपने आप से घृणा होने लगती है। तुम भोले ही नहीं, अंधे भी हो। आखिर तुमने मेरे अन्दर क्या पाया है कि मुझसे प्रेम करने लगे हो ? मैं तुम्हारे योग्य नहीं हूँ, मेरे प्यारे। मैं तुम्हारे आदर्शों के सामने टिक नहीं सकती। मैं एक साधारण औरत हूँ। प्रयत्न करके भी मैं उस ऊँचाई पर नहीं पहुँच सकती जहाँ मुझे उठाने की कोशिश तुम करते हो। तुम्हें शायद यह जानकर आश्चर्य होगा कि मैं उस ऊँचाई तक पहुँचना चाहती भी नहीं। मुझे सिर्फ जीवन का आनन्द चाहिए, प्रेम का आदर्श नहीं। मैं यह नहीं कहती कि कोई गन्दगी के ढेर पर लोटे। मिस जोन्स के लिए मेरे हृदय में स्नेह है, आदर नहीं लेकिन एक आदर्श के लिए, एक ऐसी वस्तु के लिए जो अन्त में सिर्फ एक भ्रम भी साबित हो सकती है, मैं जिन्दगी के सुखों का बलिदान करने के लिए तैयार नहीं। सम्भव है उस आदर्श में कोई तथ्य हो; लेकिन इसकी भी उतनी ही सम्भावना है कि वह एक प्रवंचना-मात्र ही हो।"

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 168p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Mrigtrishna
Your Rating

Author: Jagdish Prasad Singh

जगदीश प्रसाद सिंह

क़रीब चार दशकों तक अंग्रेज़ी भाषा और साहित्य के प्राध्यापक रहने के बाद कुछ वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए। अपने सेवा-काल के अन्तिम तेरह वर्षों तक ये मगध विश्वविद्यालय, बोधगया (बिहार) के अंग्रेज़ी विभाग के अध्यक्ष रहे।

अंग्रेज़ी में इनकी तीन आलोचनात्मक पुस्तकें और तीन उपन्यास प्रकाशित हैं। हिन्दी में इनके चार उपन्यास और तीन कहानी-संग्रह प्रकाशित हैं।

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top