वह खिल-खिलाकर हँस पड़ी। रात के उस शांत वातावरण में उसकी हँसी मूर्त संगीत की तरह गंगा की लहरों पर फैल गयी। वह बोली—“उदय, तुम इतने भोले हो कि कभी-कभी मुझे अपने आप से घृणा होने लगती है। तुम भोले ही नहीं, अंधे भी हो। आखिर तुमने मेरे अन्दर क्या पाया है कि मुझसे प्रेम करने लगे हो ? मैं तुम्हारे योग्य नहीं हूँ, मेरे प्यारे। मैं तुम्हारे आदर्शों के सामने टिक नहीं सकती। मैं एक साधारण औरत हूँ। प्रयत्न करके भी मैं उस ऊँचाई पर नहीं पहुँच सकती जहाँ मुझे उठाने की कोशिश तुम करते हो। तुम्हें शायद यह जानकर आश्चर्य होगा कि मैं उस ऊँचाई तक पहुँचना चाहती भी नहीं। मुझे सिर्फ जीवन का आनन्द चाहिए, प्रेम का आदर्श नहीं। मैं यह नहीं कहती कि कोई गन्दगी के ढेर पर लोटे। मिस जोन्स के लिए मेरे हृदय में स्नेह है, आदर नहीं लेकिन एक आदर्श के लिए, एक ऐसी वस्तु के लिए जो अन्त में सिर्फ एक भ्रम भी साबित हो सकती है, मैं जिन्दगी के सुखों का बलिदान करने के लिए तैयार नहीं। सम्भव है उस आदर्श में कोई तथ्य हो; लेकिन इसकी भी उतनी ही सम्भावना है कि वह एक प्रवंचना-मात्र ही हो।"
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2026 |
| Edition Year | 2026, Ed. 1st |
| Pages | 168p |
| Publisher | Radhakrishna Prakashan |
| Dimensions | 22.5 X 14.5 X 1.5 |