Desh, Dharma Aur Sahitya

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Desh, Dharma Aur Sahitya

साहित्य वास्तव में मनुष्य धर्म को रेखांकित करनेवाला वह रूप है, जो अपने देश के समाज के परिदृश्य को उसके बहुआयामी रंगों में कैनवस पर फैला हुआ दिखलाता है। साहित्य ही देश को गति भी देता है और उसे जीवंत बनाने का प्रयत्न करता है।

धर्म से साहित्य का रिश्ता एक ख़ास मायने में परिलक्षित होता है। साहित्य द्वारा ही धर्म का परिचालन होता है, लेकिन वह धर्म से तटस्थ रहकर अपनी बात कह सकने में समर्थ है।

इसीलिए ये तीनों लेखक को परस्पर ओत-प्रोत दिखाई पड़े हैं। ये अन्दर या बाहर रहते हुए भी एक-दूसरे के पूरक होने का आभास देते हैं।

संग्रह के निबन्धों में आज का समय कहीं भी ओझल नहीं हुआ, बल्कि ठोस धरातल पर क़दम जमाए खड़ा है, परन्तु कालातीत से ग्रहण करने की पूरी क्षमता भी रखता है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1992
Edition Year 2022, Ed. 4th
Pages 107p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21 X 14 X 1.5
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Vidhyaniwas Mishra

Author: Vidhyaniwas Mishra

डॉ. विद्यानिवास मिश्र

जन्म : 28 जनवरी, 1926; गाँव—पकड़डीहा, ज़िला—गोरखपुर। प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में, माध्यमिक शिक्षा गोरखपुर में, संस्कृत की पारम्परिक शिक्षा घर पर और वाराणसी में। 1945 में प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए.। हिन्दी साहित्य सम्मेलन में स्वर्गीय राहुल की छाया में कोश-कार्य, फिर पं. श्रीनारायण चतुर्वेदी की प्रेरणा से आकाशवाणी में कोश-कार्य, विंध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूचना विभागों में सेवा, गोरखपुर विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और आगरा विश्वविद्यालयों में क्रमशः अध्यापन संस्कृत और भाषा-विज्ञान का। 1960-61 और 1967-68 में कैलिफ़ोर्निया और वाशिंगटन विश्वविद्यालयों में अतिथि अध्यापक। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के निदेशक; काशी विद्यापीठ तथा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति-पद से निवृत्त होने के बाद कुछ वर्षों के लिए नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली के सम्पादक भी रहे।

प्रमुख कृतियाँ : ‘शेफाली झर रही है’, ‘गाँव का मन’, ‘संचारिणी’, ‘लागौ रंग हरी’, ‘भ्रमरानन्द के पत्र’, ‘अंगद की नियति’, ‘छितवन की छाँह’, ‘कदम की फूली डाल’, ‘तुम चन्दन हम पानी’, ‘आँगन का पंछी और बनजारा मन’, ‘मैंने सिल पहुँचाई’, ‘साहित्य की चेतना’, ‘बसन्त आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं’, ‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है’, ‘परम्परा बन्धन नहीं’, ‘कँटीले तारों के आर-पार’, ‘कौन तू फुलवा बीननि हारी’, ‘अस्मिता के लिए’, ‘देश, धर्म और साहित्य’ (निबन्ध-संग्रह); ‘दि डिस्क्रिप्टिव टेकनीक ऑफ़ पाणिनि’, ‘रीतिविज्ञान’, ‘भारतीय भाषा-दर्शन की पीठिका’, ‘हिन्दी की शब्द-सम्पदा’ (शोध); ‘पानी की पुकार’ (कविता-संग्रह); ‘रसखान रचनावली’, ‘रहीम ग्रन्थावली’, ‘देव की दीपशिखा’, ‘आलम ग्रन्थावली’, ‘नई कविता की मुक्तधारा’, ‘हिन्दी की जनपदीय कविता’ (सम्पादित)।

निधन : 14 फ़रवरी, 2005

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