पूर्वोत्तर भारत : भाषिक एवं सामाजिक संवेदना न केवल पूर्वोत्तर की भाषिक और सामाजिक संवेदना को उद्घाटित करती है बल्कि यह पूर्वोत्तर के बहाने पूरे भारत की भाषिक और सामाजिक संवेदना को पकड़ने का माध्यम है। भाषा का ऐसा बहुरंगी रूप और संवेदना की मूल्यवान शृंखला जो शेष भारत से अछूती रही, सदियों तक न तो उस पर किसी का ध्यान गया न ही कोई आकर्षित हुआ। पूर्वोत्तर के जीवंत जीवन और उन संवेदनाओं को वह स्थान नहीं मिला जिनके वह हकदार थे। पूर्वोत्तर की भाषिक और सामाजिक संवेदनाएं शेष भारत के धड़कनों के साथ ही अपनी कला और संस्कृति को लेकर धड़कना चाहती हैं। जरूरत है उन्हें अपनाने की, अपना बना लेने की।
इस पुस्तक में जो भी आलेख प्रस्तुत है वे सभी कहीं ना कहीं हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक व भाषिक स्थितियों पर प्रकाश डालते हैं और समाज को सकारात्मक उद्देश्य के साथ एक नई चुनौती को स्वीकार करते हैं।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2026 |
| Edition Year | 2026, Ed. 1st |
| Pages | 160p |
| Publisher | Lokbharti Prakashan |
| Dimensions | 22 X 14 X 1.5 |