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Vandana Mishra

Vandana Mishra

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वंदना मिश्र

अनुवादक, पत्रकार, कवि और समाजकर्मी वंदना मिश्र की

महिला खेलों में गहरी ​दिलचस्पी रही है। विशेषकर भारत में महिला क्रिकेट की औपचारिक शुरुआत के बाद से ही उनकी नज़र इस खेल पर रही है। महिला खेलों की उपेक्षा पर उन्होंने विभिन्न

पत्र-पत्रिकाओं में कई लेख भी लिखे हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अन्तरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान से एम.फिल. किया है। अब तक दस से अधिक पुस्तकों का अनुवाद कर चुकी हैं, जिनमें—‘भारतीय समाज’, ‘भारतीय राष्ट्रवाद की अधुनातन

प्रवृत्तियाँ’, ‘यूरोपीय उदारवाद का उदय’, ‘संचार के सिद्धान्त’, ‘आधुनिक समाज में वर्ग’, ‘बुद्धि के व्यवस्थापक’, ‘ले के रहेंगे अपना पानी’, ‘भारतीय राज्य और समाज’, ‘लिंगभाव का मानव वैज्ञानिक अन्वेषण’ शामिल हैं। कुछ पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। एक कविता-संग्रह ‘वे फिर आये हैं’ भी प्रकाशित।

सम्प्रति : डॉ. राही मासूम रज़ा साहित्य अकादमी की अध्यक्ष तथा साहित्यिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में समान रूप से सक्रिय।

ई-मेल : [email protected] 

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