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Mahila Cricket Ki Kahani

Author: Vandana Mishra
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Mahila Cricket Ki Kahani

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2025 में भारत की महिला क्रिकेट टीम ने अपना पहला आईसीसी महिला वर्ल्ड कप जीतकर क्रिकेट की पुरुष-केन्द्रित दुनिया में अपनी बड़ी दावेदारी पेश की। क्रिकेट प्रेमियों ने भी इसका स्वागत उतने ही जोशो-खरोस के साथ किया।

लेकिन इस उपलब्धि के पीछे भारत में महिला क्रिकेट का एक लम्बा इतिहास रहा है जिसमें खेल के लिए जरूरी साधनों का अभाव और ‌स्त्रियों के प्रति भारतीय समाज का पक्षपातपूर्ण रवैया भी बाधाएँ पैदा करता रहा। इसके बावजूद महिला क्रिकेटरों ने अपना सफर जारी रखा और आज वे पुरुष क्रिकेटरों के बराबर आ खड़ी हुई हैं।

‘महिला क्रिकेट की कहानी’ किताब भारतीय महिला क्रिकेट के अब तक के सफर और उसके जज्बे का इतिहास बताती है। लेकिन सिर्फ इतना ही नहीं, बाकी विश्व में महिला क्रिकेट की स्थिति क्या है, एक पूरा अध्याय इस पर भी है।

महिला क्रिकेटरों का विस्तृत परिचय, उनकी उपलब्धियों, उनके कीर्तिमानों, उन्हें मिले सम्मान-पुरस्कारों के साथ-साथ यह पुस्तक अन्तर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेट के नियमों की जानकारी भी उपलब्ध कराती है।

भारत और विश्व महिला क्रिकेट पर एक सम्पूर्ण किताब। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 248p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Vandana Mishra

Author: Vandana Mishra

वंदना मिश्र

अनुवादक, पत्रकार, कवि और समाजकर्मी वंदना मिश्र की

महिला खेलों में गहरी ​दिलचस्पी रही है। विशेषकर भारत में महिला क्रिकेट की औपचारिक शुरुआत के बाद से ही उनकी नज़र इस खेल पर रही है। महिला खेलों की उपेक्षा पर उन्होंने विभिन्न

पत्र-पत्रिकाओं में कई लेख भी लिखे हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अन्तरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान से एम.फिल. किया है। अब तक दस से अधिक पुस्तकों का अनुवाद कर चुकी हैं, जिनमें—‘भारतीय समाज’, ‘भारतीय राष्ट्रवाद की अधुनातन

प्रवृत्तियाँ’, ‘यूरोपीय उदारवाद का उदय’, ‘संचार के सिद्धान्त’, ‘आधुनिक समाज में वर्ग’, ‘बुद्धि के व्यवस्थापक’, ‘ले के रहेंगे अपना पानी’, ‘भारतीय राज्य और समाज’, ‘लिंगभाव का मानव वैज्ञानिक अन्वेषण’ शामिल हैं। कुछ पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। एक कविता-संग्रह ‘वे फिर आये हैं’ भी प्रकाशित।

सम्प्रति : डॉ. राही मासूम रज़ा साहित्य अकादमी की अध्यक्ष तथा साहित्यिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में समान रूप से सक्रिय।

ई-मेल : [email protected] 

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