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Interval Ke Baad

Author: Vidyabhooshan
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Interval Ke Baad

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‘इंटरवल के बाद’ में संकलित कहानियों के केन्द्र में मुख्यतः छोटे शहरों का मध्यवर्गीय जीवन और उसकी विभिन्न स्थितियाँ हैं। सामाजिक जवाबदेही के प्रति गहरी सजगता इन कहानियों को एक अलग रंग देती है, और हमें सचेत करती है कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों में किसी भी बदलाव को सावधानीपूर्वक अपनाना चाहिए।

उदाहरण के लिए संग्रह में शामिल ‘सरे-राह चलते-चलते’ की कमला और विजय एक क्षण‌िक बौखलाहट के चलते शुरू हुए अपने भावनात्मक विचलन को समय रहते इसलिए सँभाल लेते हैं कि उन्हें उसका कोई भविष्य नहीं दिखता, और न ही वे उसके लिए कोई बड़ा जोखिम उठाने की स्थिति में है।

‘एक पिता का जन्म’ शीर्षक कहानी भी एक भविष्यहीन रिश्ते के पनपने से पहले ही अपने सामाजिक दायित्व की ओर लौट जाती है। ‘गली के मोड़ पर दोराहा है’ की नायिका भी सामाजिक सीमाओं को बहुत गहराई से महसूस करती है, लेकिन उसके बरक्स अपने मन में उठते सवाल की अनसुनी भी वह नहीं करती। वह पाठक से ही प्रश्न करती है कि दाएँ मुड़ूँ या बाएँ!

पात्रों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल इन कहानियों की विशेषता है, और कथा-प्रवाह इन्हें खासतौर पर पठनीय बनाता है। पारिवारिक और भावनात्मक रिश्तों के अलावा इस संग्रह में ‘पत्थरों की दास्तान’ जैसी कहानी भी है जिसमें शिल्प, विवरण और कथ्य एक अलग ही स्तर पर पाठक के सामने खुलते हैं। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 160p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Author: Vidyabhooshan

विद्याभूषण

विद्याभूषण का जन्म 5 सितम्बर, 1940 को हुआ। उन्होंने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। अध्यापकी, सरकारी नौकरी, व्यवसाय, खेतीबारी और पत्रकारिता के सामयिक पड़ावों के बाद समाज, साहित्य और संस्कृति क्षेत्र में कई दिशाखोजी गतिविधियों से गुजरते हुए अब सृजन और विचार की शब्द-यात्रा।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘सिर्फ सोलह सफे’, ‘अतिपूर्वा’, ‘सीढ़ियों पर धूप’, ‘ईंधन चुनते हुए’, ‘आग के आसपास’, ‘ईंधन और आग के बीच’, ‘बीस सुरों की सदी’, ‘पठार को सुनो’, ‘कस्बे का कवि’, ‘अथ से इति तक’ (कविता-संग्रह); ‘मन एक जंगल है’, ‘लब पर लय की लौ’ (गीत-संग्रह); ‘कोरस’, ‘कोरस वाली गली’, ‘नायाब नर्सरी’ (कहानी-संग्रह); ‘अधिवास की फाँस’, ‘न कोई मील ना कोई पत्थर’ (उपन्यास); ‘आईने में लोग’ (नाटक); ‘कृति-संस्कृति के शब्द’ (विविधा); ‘वनस्थली के कथापुरुष’, ‘बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में, पाठ और परख’, ‘झारखंड : समाज, संस्कृति और साहित्य’, ‘झारखंड की हिन्दी परम्परा के शब्द-शिखर’, ‘कलम को तीर होने दो’ (आलोचना); ‘झारखंड : समाज, संस्कृति और विकास’, ‘इतिहास के मोड़ पर झारखंड’, ‘बदलाव के तिराहे पर झारखंड’ (समाजदर्शन); ‘कविताएँ सातवें दशक की’, ‘प्रपंच’, ‘घर की तलाश में यात्रा’, ‘महासर्ग’, ‘धूमकेतुओं की जन्मपत्री’, ‘तीसरी आँख’, ‘हारे को हरनाम’, ‘काश, यह कहानी होती’ (सम्पादन)। गुजराती, तेलुगु और अंग्रेजी में कई रचनाएँ अनूदित। कुड़ुख और नागपुरी में ‘पठार को सुनो’ (कविता-संग्रह) का भाषान्तर।

ई-मेल : [email protected] 

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