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Upanyas Ki Pahchan : Maila Aanchal

Author: Gopal Ray
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Upanyas Ki Pahchan : Maila Aanchal

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गोपाल राय द्वारा ‘उपन्यास की पहचान’ शृंखला में व्यावहारिक आलोचना को आधार बनाकर फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ की अप्रतिम रचना ‘मैला आँचल’ को परखने की प्रा​थमिक कोशिश की गई है।

कहते हैं कि ‘मैला आँचल’ के प्रकाशन के बाद हिन्दी में आंचलिक उपन्यासों का आन्दोलन-सा चल पड़ा। ऐसा नहीं है कि भारतीय ग्रामीण जीवन को केन्द्र रखकर उपन्यास न रचे गए हों; किन्तु आंचलिक उपान्यासालोचना का मानदंड रचने में ‘मैला आँचल’ की महत्ती भूमिका रही है। गोपाल राय ने ‘उपन्यास की पहचान’ शृंखला की कड़ी में इन्हीं तथ्यों का उद्घाटन करने के साथ, उपन्यास की व्यावहारिक आलोचना की सैद्धान्तिक पहचान का आधार ‘मैला आँचल’ के कथ्य और शिल्प में तराशने की समग्र कोशिश की है।

यह पुस्तक आंचलिक उपन्यास की अवधारणा और हिन्दी उपन्यास की परम्परा को रेखांकित करने के साथ-साथ फणीश्वरनाथ रेणु की उपन्यास-यात्रा पर भी अपनी बात रखती है। ‘मैला आँचल’ के कथ्य, शिल्प, पात्र-योजना, भाषा आदि के रचनात्मक तत्त्वों पर प्राथमिक बयान दर्ज करती है।

कह सकते हैं कि उपन्यास के रचनात्मक मानकों की व्यावहारिक परख करते हुए ‘मैला आँचल’ की पढ़त को यह पुस्तक नये आयाम प्रदान करेगी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 216p
Publisher Radhakrishna Prakashan
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Gopal Ray

Author: Gopal Ray

गोपाल राय

गोपाल राय का जन्म 13 जुलाई, 1932 को बक्सर, बिहार के गाँव चुन्नी में हुआ था। उनकी आरम्भिक शिक्षा गाँव और निकटस्थ कस्बे के स्कूल में हुई। उन्होंने हिन्दी विभाग, पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर किया। पटना विश्वविद्यालय से ही 1964 में ‘हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’ विषय पर डी.लिट. की उपाधि प्राप्त की। 21 फरवरी, 1957 को पटना विश्वविद्यालय, पटना में हिन्दी प्राध्यापक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई जहाँ से 4 दिसम्बर, 1992 को सेवानिवृत्त हुए।

उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’, ‘हिन्दी उपन्यास कोश’ (दो खंडों में), ‘उपन्यास का शिल्प’, ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’, ‘हिन्दी भाषा का विकास’, ‘हिन्दी कहानी का इतिहास’ (तीन खंडों में), ‘उपन्यास की पहचान श्रृंखला’ के अन्तर्गत—‘शेखर : एक जीवनी’, ‘गोदान : नया परिप्रेक्ष्य’, ‘रंगभूमि : पुनर्मूल्यांकन’, ‘मैला आँचल’, ‘दिव्या’, ‘महाभोज’, ‘हिन्दी उपन्यास का इतिहास’, ‘उपन्यास की संरचना’, ‘अज्ञेय और उनका कथा-साहित्य’। उन्होंने पं. गौरीदत्त कृत ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’, ‘राष्ट्रकवि दिनकर’ का सम्पादन किया। कई वर्षों तक समीक्षा पत्रिका का सम्पादन-प्रकाशन भी किया।

25 सितम्बर, 2015 को उनका निधन हुआ। 

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