इस पुस्तक में सिविल सेवा में रत अभ्यर्थियों के संघर्ष का जीता-जागता चित्र प्रस्तुत किया गया है।
उपन्यास और संस्मरण की भूमध्य रेखा पर फिसलती-सरकती एक सहज-सरल कृति है जो स्वयं में सुनहरे भविष्य के लिए संघर्ष करने वाले किशोर-युवा पीढ़ी के अन्तर्द्वन्दों, वेदनाओं, छोटी-छोटी खुशियों को समेटे हुए, धुप्प अंधकार में मार्ग खोजती उनकी अदम्य जीजीविषा को अतीव रोचकता और स्पष्टता से प्रस्तुत करती है। एक ऐसा आख्यान, जहाँ सिविल सेवाओं की तैयारी करने वालों की अनजानी दुनियाँ पूरी विश्वसनीयता के साथ उपस्थित होती है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back, Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2025 |
| Edition Year | 2025, Ed. 1st |
| Pages | 280p |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 22 X 14 X 2 |