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‘रेत’ ऐसे दुर्दम्य समाज की कथा है जिसकी परम्पराओं पर हम सहजता से विश्वास नहीं कर सकते। यह उपन्यास कंजर जनजाति की आस्था, धार्मिक विश्वास, समाज, संस्कृति का आईना है। उपन्यास ‘रेत’ के केन्द्र में कमला सदन है जहाँ एक ही घर की चौहद्दी में एक साथ दो अन्तर्विरोधी परम्पराएँ आमने-सामने टकरा रही हैं। खेलावड़ी (वेश्यावृत्ति) के पेशे के साथ कमला बुआ, सुशीला, माया, रुकमणि, वंदना और पूनम एक ही घर में सन्‍तो और अनीता भाभी, यानी विधिवत् विवाह के बाद भाभी कही जानेवाली पतिव्रताओं के साथ रहती हैं। कमला बुआ उपन्यास में मातृसत्तात्मक वर्चस्व की प्रतीक है और ‘भाभी’ ब्याहता होते हुए भी बाहर से लाई गई दोयम दर्जे की सदस्या। मोरवाल का यह उपन्यास अद्भुत क़‍िस्सागोई के साथ ही हिन्दी में नारी-विमर्श का सूत्रपात करता है। प्रकाशन के बाद से ही विवादों के केन्द्र में रहे ‘रेत’ उपन्यास में कंजर जनजाति (काननचर जनजाति) के लोक विश्वासों, प्रथाओं, जीवन-शैली और परम्पराओं का सटीक और दिलचस्पप विवरण है। जरायम पेशा और कथित सभ्य समाज के मध्य गड़ी यौन-शुचिताओं का अतिक्रमण करता यह उपन्यास आज भी अपनी विलक्षण छवि बनाए हुए है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2008
Edition Year 2013, Ed. 2nd
Pages 324P
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Editorial Review

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Bhagwandas Morwal

Author: Bhagwandas Morwal

भगवानदास मोरवाल

जन्म : 23 जनवरी, 1960; नगीना, ज़िला—मेवात (हरियाणा)।

शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) एवं पत्रकारिता में डिप्लोमा।

प्रकाशित कृतियाँ : ‘काला पहाड़’ (1999), ‘बाबल तेरा देस में’ (2004), ‘रेत’ (2008) उर्दू में अनुवाद, ‘नरक मसीहा’ (2014) मराठी में अनुवाद, ‘हलाला’ (2015) उर्दू व अंग्रेज़ी में अनुवाद, ‘सुर बंजारन’ (2017), ‘वंचना’ (2019) तथा ‘शकुंतिका’ (2020) (उपन्यास); ‘सिला हुआ आदमी’ (1986), ‘सूर्यास्त से पहले’ (1990), ‘अस्सी मॉडल उर्फ़ सूबेदार’ (1994), ‘सीढ़ियाँ, माँ और उसका देवता’ (2008), ‘लक्ष्मण-रेखा’ (2010), ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ’ (2014) (कहानी-संग्रह); ‘पकी जेठ का गुलमोहर’ (2016) (स्मृति-कथा); ‘लेखक का मन’ (2017) (वैचारिकी); ‘दोपहरी चुप है’ (1990) (कविता); ‘बच्चों के लिए कलयुगी पंचायत’ (1997) एवं अन्य दो पुस्तकों का सम्पादन।

सम्मान : ‘वनमाली कथा सम्मान’ (2019), भोपाल; ‘स्पंदन पुरस्कार’ (2017), भोपाल; ‘श्रवण सहाय एवार्ड’ (2012); ‘जनकवि मेहरसिंह सम्मान’ (2010), हरियाणा साहित्य अकादमी; ‘अन्तरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान’ (2009), लन्दन; ‘शब्द साधक ज्यूरी सम्मान’ (2009); ‘कथाक्रम सम्मान’ (2006), लखनऊ; ‘साहित्यकार सम्मान’ (2004), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; ‘साहित्यिक कृति सम्मान’ (1994), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; ‘साहित्यिक कृति सम्मान’ (1999), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; पूर्व राष्ट्रपति श्री आर. वेंकटरमण द्वारा मद्रास का ‘राजाजी सम्मान’ (1995); ‘डॉ. अम्बेडकर सम्मान’ (1985), भारतीय दलित साहित्य अकादमी; ‘पत्रकारिता के लिए प्रभादत्त मेमोरियल एवार्ड’ (1985) तथा ‘शोभना एवार्ड’ (1984)।

जनवरी 2008 में ट्यूरिन (इटली) में आयोजित भारतीय लेखक सम्मेलन में शिरकत।

पूर्व सदस्य, हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार एवं हरियाणा साहित्य अकादमी।

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