Kavita
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कविता
कविता का जन्म 15 अगस्त को मुजफ्फरपुर बिहार में हुआ। हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर और राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली से भारतीय कलानिधि। पिछले ढाई दशकों से कहानी की दुनिया में सतत सक्रिय कविता स्त्री जीवन के बारीक रेशों से बुनी स्वप्न और प्रतिरोध की सकारात्मक कहानियों के लिए जानी जाती हैं।
उनकी प्रकाशित कृतियाँ—‘मेरी नाप के कपड़े’, ‘उलटबाँसी’, ‘नदी जो अब भी बहती है’, ‘आवाजों वाली गली’, ‘क से कहानी घ से घर’, ‘उस गोलार्द्ध से’, ‘माई री’, ‘गौरतलब कहानियाँ’, ‘मैं और मेरी कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘मेरा पता कोई और है’, ‘ये दीये रात की ज़रूरत थे’ (उपन्यास); ‘मैं हंस नहीं पढ़ता’, ‘वह सुबह कभी तो आएगी’, ‘जवाब दो विक्रमादित्य’ तथा ‘अब वे वहाँ नहीं रहते’ (सम्पादन)। उनकी कुछ कहानियाँ अंग्रेजी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में अनूदित हैं।
उन्हें कविता और निबन्ध लेखन के लिए बिहार सरकार द्वारा ‘युवा पुरस्कार’ (1993), ‘मेरी नाप के कपड़े’ के लिए ‘अमृत लाल नागर कहानी पुरस्कार’ (2004), ‘क से कहानी घ से घर’ के लिए ‘स्पंदन सम्मान’ (2022) तथा बिहार सरकार द्वारा ‘विद्यापति पुरस्कार’ (2023) से सम्मानित किया गया है।
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