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Nagasaki Ki Vidhvans-Katha

Author: Hayashi Kyoko
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Nagasaki Ki Vidhvans-Katha

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ख़तरे की चेतावनी के बिना ऊपर आकाश से पैराशूट के

            खुलने के साथ गिर रहे परमाणु बम को कुछ लोग मुँह

            बाए देख रहे थे। उन्होंने सोचा कि शायद जहाज़ अमेरिकी

            युद्धबन्दियों के लिए खाद्य-सामग्री गिरा रहे हैं।

ये पंक्तियां उस पल के बारे में हैं जब अमेरिका का बोक्सकार नामक जहाज नागासाकी के ऊपर परमाणु बम गिरा रहा था। इस उपन्यास की लेखिका उस समय स्कूल में पढ़ती थीं और उस दिन सैकड़ों छात्रों और मजदूरों के साथ उस स्थान से कुछ ही दूरी पर  श्रमदान में लगी हुई थीं।

परमाणु-विस्फोट की भुक्तभोगी लेखिका के इस आत्मकथात्मक उपन्यास में नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम के फौरी तथा बाद के समय में सामने आए प्रभावों-अनुभवों का यथार्थ विवरण प्रस्तुत किया गया है। जहाँ आवश्यक था वहाँ उन्होंने सर्वेक्षण-रपटों और अन्य दस्तावेजों का प्रयोग भी इसमें किया है।

मुख्यतः नौ अगस्त, 1945 की सुबह से लेकर उसके बाद की लगभग दो महीनों की अवधि के दौरान जापान के नागासाकी शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हुए घटनाक्रम का यह वास्तविक लेखा-जोखा युद्ध के विरुद्ध एक चेतावनी है जो आज के समय, जब युद्ध के लिए एक अजीब सी व्याकुलता विश्व में देखी जा रही है, खास तौर पर प्रासंगिक है।

इस उपन्यास को पढ़ना एक पीड़ादायी अनुभव है लेकिन इससे गुजरना भी जरूरी है। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 112p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 19.5 X 13 X 1
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Hayashi Kyoko

Author: Hayashi Kyoko

हायाशि क्योको

​जापानी लेखिका हायाशि क्योको का जन्म 28 अगस्त, 1930 को नागासाकी में हुआ। उनके बचपन का अधिकांश समय चीन के शंघाई में बीता। फ़रवरी 1945 में देश-वापसी के बाद वे नागासाकी गर्ल्स हाई स्कूल में दाखिल हुईं। 9 अगस्त, 1945 को नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के फलस्वरूप वे गम्भीर विकिरण की शिकार हुईं। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘गियामान बीदोरो’, ‘मिश्शेरनो कुचिबेनि’, ‘नाकिगा गोतोकि’, ‘शंघाई’, ‘सान्गाइनो इए’। ‘नागासाकी की विध्वंस-कथा’ को 1975 में जापान के दो पुरस्कारों—‘गुन्ज़ो शिंजिन पुरस्कार’ और ‘अकुतागावा पुरस्कार’ से नवाज़ा गया। इसके अलावा उन्हें जापान के अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों, जैसे ‘कावाबाता पुरस्कार’, ‘तानिज़ाकि पुरस्कार’, ‘नोमा पुरस्कार’ आदि से सम्मानित किया गया।

19 फ़रवरी, 2017 को उनका देहान्त हुआ।

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