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Shukmaya Hangma

Author: Shobha Limboo
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Shukmaya Hangma

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‘शुकमाया हाङमा’ लिम्बू आदिवासी समुदाय की एक सशक्त, स्वाभिमानी स्त्री की सच्ची कहानी पर आधारित उपन्यास है।

शुकमाया के जीवन का आरम्भ नैसर्गिक सुषमा से परिपूर्ण और पारम्परिक जीवनशैली की प्रधानता वाले परिवेश में होता है। लेकिन विवाह के बाद वह ख़ुद को न केवल नई जगह और नए परिवेश में पाती है, बल्कि उसका जीवन भी नई चुनौतियों से घिर जाता है। बर्मा युद्ध का छिड़ना शुकमाया के लिए एक प्रचंड आघात साबित होता है जिसमें उसे अपने पति, पुत्र और श्वसुर को खो देना पड़ता है। वस्तुत: बर्मा युद्ध को पृष्ठभूमि बनाकर रची गई यह कृति उस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा और क्षत-विक्षत मन की कहानी को भी पूरी मार्मिकता से सामने लाती है।

विपरीत-से-विपरीत परिस्थितियों में शुकमाया जिस दृढ़ता से खड़ी रहती है और जीवन को सँभालती चलती है, वह अपनी परवर्ती पीढ़ी के लिए प्रेरक और स्मरणीय बन जाती है। जिस आदिवासी समुदाय और जिस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अंकन इस उपन्यास में किया गया है वह हिन्दी पाठकों के लिए अपेक्षाकृत कम जाना-सुना है। इस तरह देखें तो यह उपन्यास हिन्दी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ता है। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 200p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 12.5 X 1.5
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Author: Shobha Limboo

शोभा लिम्बू

शोभा लिम्बू का जन्म सन् 1967 में हुआ। उन्होंने विश्वभारती, शान्तिनिकेतन से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है और पटना विश्वविद्यालय, पटना से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। वे हिन्दी, नेपाली, लिम्बू और अंग्रेज़ी में निष्णात हैं। उन्होंने नेपाली और लिम्बू से हिन्दी में अनुवाद भी किया है। लिम्बू भाषा से नेपाली में भी कई अनुवाद किए हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘लिम्बू भाषा का स्वरूप विकास’, ‘थाक्थुङ्ग : मुक-खेदा’, ‘प्रसाद की कहानियों का शास्त्रीय अध्ययन’, ‘शुकमाया हाङमा’। उन्हें भारतीय दल‌ित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के ‘वीरांगना सावित्री बाई फुले राष्ट्रीय सम्मान' और ‘अन्तरराष्ट्रीय तथागत विशिष्ट सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है। वे दार्जिलिंग हिन्दी भाषी मंच की अध्यक्ष हैं।

फ़िलहाल वे कलिम्पोंग कॉलेज, कलिम्पोंग (पश्चिम बंगाल) में हिन्दी की अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।

ई-मेल : [email protected]

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