अलग सरावगी की पहली ही कहानी, ‘आपकी हँसी’ से हिन्दी जगत का ध्यान उनके विशिष्ट शिल्प की ओर चला गया था। उसके बाद आई उनकी कहानियों और उपन्यासों ने न सिर्फ़ अपना वह वैशिष्ट्य बरक़रार रखा, बल्कि उसे और सघन भी किया। इस प्रतिनिधि संचयन में शामिल उनकी कहानियाँ भी इस तथ्य की तस्दीक़ करती हैं कि उनके लिए तथ्य जितना अहम है, उसका ऐसा सम्प्रेषण भी उतनी ही अहमियत रखता है जो पाठक के मन पर एक दीर्घजीवी प्रभाव छोड़े। सामाजिक परिस्थितियों, पारिवारिक और मानवीय रिश्तों, उनके भीतर पलतीं-पनपतीं विडम्बनाओं, आशाओं-हताशाओं को उन्होंने न सिर्फ़ एक कथाकार की तरह, बल्कि मानवीय मूल्यों के प्रतिबद्ध कार्यकर्ता की तरह अपनी कहानियों में अंकित किया है।
इस संकलन में प्रस्तुत कहानियाँ उनकी कथा-संवेदना और कथा-विन्यास को समझने में महत्त्वपूर्ण साबित होंगी।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2025 |
| Edition Year | 2025, Ed. 1st |
| Pages | 152p |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 17.5 X 12 X 1 |