Kali-Katha : Via Bypass

Fiction : Novel
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Kali-Katha : Via Bypass
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‘श्रीकांत वर्मा पुरस्कार’ और 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' से सम्मानित यह उपन्यास अलका सरावगी की पहली औपन्यासिक रचना थी। इस उपन्यास ने न सिर्फ़ उन्हें हिन्दी साहित्य-जगत का सितारा लेखक बना दिया, बल्कि अब तक चली आ रही उपन्यास-परम्परा को भी एक नया मोड़ दिया। इसने कथा-लेखन की एक ठहरी और इकहरी शैली से ऊबे हिन्दी पाठक को एक ऐसी भाषा और कहन दी जिससे उसने अचानक अपने को समृद्ध अनुभव किया।

एक मारवाड़ी परिवार की कई पीढ़ियों की दास्तान कहनेवाला यह उपन्यास शायद भाषा में उस दृष्टि को पिरोनेवाला पहला उपन्यास था जिसने नब्बे के दशक में देश में उदारीकरण के बाद जन्म लिया था। आज़ाद भारत में निर्मित सामाजिकता के प्रचलित पैमानों पर जीते मनुष्य की भीतरी अजनबीयत की पहचान से शुरू होती यह कथा अंग्रेज़ों द्वारा भारत में रेलवे लाने के शुरुआती दिनों से लेकर सन् 2000 तक के इतिहास का अवलोकन करती है। इसमें कोलकाता शहर का इतिहास भी पढ़ा जा सकता है, और मोटा-मोटी ढंग से भारत में सामाजिक-नैतिक मूल्यों के निर्माण और ध्वंस का भी।

कहानी किशोर बाबू की है जो अपनी बाइपास सर्जरी के बाद दुनिया को बिलकुल ही अलग सिरे से देखने लगते हैं, वे किशोर बाबू जो जीवन-भर दक्षिणी कोलकाता के अभिजात समाज का हिस्सा रहे अचानक ‘सड़कमाप’ बन जाते हैं, कोलकाता की अभद्र सड़कों पर भटकते दिखने लगते हैं और अपनी इसी यात्रा में अपने परिवार के पुरखों से लेकर अपनी तीन वर्षीय नातिन तक के समय को खँगाल देते हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2018
Edition Year 2018
Pages 232p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 2
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Editorial Review

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Alka Saraogi

Author: Alka Saraogi

अलका सरावगी

अलका सरावगी का जन्म 1960 ई. के नवम्बर माह में हुआ। आपके पहले ही उपन्यास कलि-कथा : वाया बाइपास को वर्ष 1998 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अन्य कृतियाँ : शेष कादम्बरी (बिहारी पुरस्कार), कोई बात नहीं, एक ब्रेक के बाद, जानकीदास तेजपाल मैनशन, एक सच्ची-झूठी गाथा (उपन्यास)। कहानी की तलाश में, दूसरी कहानी (कहानी-संग्रह)।

जर्मन, फ्रेंच, इटालियन, स्पेनिश, अंग्रेजी तथा अनेक भारतीय भाषाओं में कृतियाँ अनूदित।

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